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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

लाल किला ब्लास्ट मामले में कोर्ट सख्त, चार्जशीट में आरोपियों का संक्षिप्त परिचय दर्ज करने का निर्देश

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
लाल किला ब्लास्ट मामले में कोर्ट सख्त, चार्जशीट में आरोपियों का संक्षिप्त परिचय दर्ज करने का निर्देश

नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले के पटियाला हाउस कोर्ट से राउज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरण के बाद पहली बार सुनवाई हुई। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कहा कि चार्जशीट में सभी आरोपियों का एक ब्रीफ बैकग्राउंड (संक्षिप्त पृष्ठभूमि) का उल्लेख करना उचित होगा, जिससे साजिश में उनकी भूमिका का पता लगे।

अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि एनआईए ने 14 मई 2026 को मुख्य आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसके बाद पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया गया। अभी तक आरोपपत्र में दर्ज अपराधों का संज्ञान नहीं लिया गया है। आरोप पत्र पर 27 अगस्त को सुनवाई होगी। इस मामले में एक आरोपी डॉ. उमर उन नबी की मौत हो चुकी है।

उमर उन नबी पर लाल किला इलाके में हुए कार धमाके से जुड़े होने का आरोप है। बताया गया है कि उमर उसी कार में मौजूद था, जिसमें विस्फोट हुआ था और धमाके में उसकी मौत हो गई थी।

अदालत ने एनआईए को डॉ. उमर उन नबी की मौत की आधिकारिक पुष्टि से संबंधित डेथ सर्टिफिकेट,डेथ वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत उनकी मृत्यु के कारण इस आरोपी के खिलाफ लंबित कार्यवाही को समाप्त करने के संबंध में स्पष्ट आदेश पारित करेगी।

पिछली अदालत ने अहलमद को मुख्य और पूरक आरोपपत्र की जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। मौजूदा अदालत ने अहलमद को उस आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया।

अदालत ने विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि वह एक संक्षिप्त सारणी तैयार करें, जिसमें प्रत्येक आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ एनआईए द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों का उल्लेख हो। इससे अदालत को आरोपपत्र पर संज्ञान के मुद्दे पर विचार करने में सुविधा होगी।

अदालत ने यह भी नोट किया कि उकाशा, फैजल, आशिम और उस्मान के खिलाफ आगे की जांच लंबित है।

एनआईए को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है कि इस लंबित जांच के बावजूद मामले में आगे की कार्यवाही की जा सकती है या नहीं।

लंबित आवेदनों को मुख्य मामले से अलग-अलग पंजीकृत कर अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई के लिए रखा गया है, ताकि इन आवेदनों के कारण मुख्य मामले की कार्यवाही प्रभावित न हो और मामले का तेजी से निपटारा किया जा सके।

आरोपी ए13 मुजफ्फर अहमद के खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी करने का आवेदन पहले ही मंजूर किया जा चुका है और इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल हो चुकी है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

संरक्षित गवाह घोषित करने की मांग वाले आवेदन पर सुनवाई 24 अगस्त को होगी।

यह आवेदन यूएपीए की धारा 44 और एनआईए अधिनियम की धारा 17 के तहत दाखिल किया गया है। एनआईए ने जवाब दाखिल करने के लिए पांच दिन का समय मांगा है।

मामले के एक अन्य आरोपी ने अपने पिता से फोन पर बातचीत की सुविधा देने की मांग की है।

जेल अधीक्षक को अदालत में मौजूद रहकर जेल में टेलीफोन सुविधा की उपलब्धता के बारे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की सुनवाई 19 अगस्त को होगी।

एक अन्य आरोपी की ओर से फोन कॉल और ई-मुलाकात की सुविधा के लिए दाखिल आवेदन रिकॉर्ड में नहीं मिल रहा था।

अदालत ने अहलमद को आवेदन तलाशकर उसे संबंधित तारीख पर अदालत के समक्ष रखने का निर्देश दिया। मुख्य मामले में अब 27 अगस्त को सुनवाई होगी। उस दिन अदालत एनआईए की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के मुद्दे पर विचार करेगी।

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