मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:46 · नई दिल्ली संस्करण

वीके सक्सेना के आपराधिक मानहानि मामले में दोषी मेधा पाटकर की सजा पर एक जुलाई को फैसला

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई

दिल्ली, । दिल्ली के साकेत कोर्ट ने दिल्ली के उप राज्यपाल

वीके सक्सेना की ओर से दाखिल आपराधिक मानहानि मामले में दोषी करार दी गई

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया

है। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने एक जुलाई को फैसला सुनाने का

आदेश दिया।

30 मई को शिकायतकर्ता वीके सक्सेना की ओर से पेश वकील ने

मेधा पाटकर को अधिकतम सजा देने की मांग की थी। भारतीय दंड संहिता में

आपराधिक मानहानि के मामले में अधिकतम दो साल की कैद की सजा का प्रावधान है।

24 मई को साकेत कोर्ट ने मेधा पाटकर को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने मेधा

पाटकर को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दोषी करार दिया था। कोर्ट

ने कहा था कि ये साफ हो गया है कि आरोपित मेधा पाटकर ने सिर्फ प्रतिष्ठा को

नुकसान पहुंचाने के लिए वीके सक्सेना के खिलाफ गलत जानकारी के साथ आरोप

लगाए।

25 नवंबर 2000 को मेधा पाटकर ने अंग्रेजी में एक बयान जारी कर

वीके सक्सेना पर हवाला के जरिये लेनदेन का आरोप लगाया था और उन्हें कायर

कहा था। मेधा पाटकर ने कहा था वीके सक्सेना गुजरात के लोगों और उनके

संसाधनों को विदेशी हितों के लिए गिरवी रख रहे थे। ऐसा बयान वीके सक्सेना

की ईमानदारी पर सीधा-सीधा हमला था।

मेधा पाटकर ने कोर्ट में

दर्ज अपने बचाव में कहा था कि वीके सक्सेना वर्ष 2000 से झूठे और मानहानि

वाले बयान जारी करते रहे हैं। पाटकर ने कहा था कि वीके सक्सेना ने 2002 में

उन पर शारीरिक हमला भी किया था जिसके बाद मेधा ने अहमदाबाद में एफआईआर

दर्ज कराया था। मेधा ने कोर्ट में कहा था कि वीके सक्सेना कॉरपोरेट हितों

के लिए काम कर रहे थे और वे सरदार सरोवर प्रोजेक्ट का विरोध करने वालों की

मांग के खिलाफ थे।

वीके सक्सेना ने 2001 में मेधा पाटकर के खिलाफ

अहमदाबाद की अदालत में आपराधिक मानहानि का केस दायर किया था। गुजरात के

ट्रायल कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया था। बाद में 2003 में सुप्रीम

कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई गुजरात से दिल्ली के साकेत कोर्ट में ट्रांसफर

कर दिया था। मेधा पाटकर ने 2011 में अपने को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का

सामना करने की बात कही। वीके सक्सेना ने जब अहमदाबाद में केस दायर किया था

उस समय वो नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के अध्यक्ष थे।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें