बेंगलुरु में 16 जुलाई को कांग्रेस का बड़ा निर्णय: बोर्ड व निगमों में नियुक्तियों को लेकर अंतिम सूची पर होगा फैसला — सीएम सिद्धारमैया ने दी जानकारी
बेंगलुरु में 16 जुलाई को कांग्रेस का बड़ा निर्णय: बोर्ड व निगमों में नियुक्तियों को लेकर अंतिम सूची पर होगा फैसला — सीएम सिद्धारमैया ने दी जानकारी
नई दिल्ली/बेंगलुरु। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में बोर्ड और निगमों में अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्तियों को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही चर्चाएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि इस विषय पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच पहले दौर की बैठक हो चुकी है, लेकिन कुछ मुद्दों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। अब आगामी 16 जुलाई की शाम को रणदीप सुरजेवाला एक बार फिर बेंगलुरु पहुंच रहे हैं, जहां इस सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से बोर्ड व निगमों में नियुक्तियों पर मंथन चल रहा है। कल सुरजेवाला और डीके शिवकुमार के बीच इस पर व्यापक चर्चा हुई, लेकिन सूची को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो सका। अब 16 जुलाई को शाम के समय सुरजेवाला जी फिर से बेंगलुरु आ रहे हैं। तब जाकर हम सूची को अंतिम रूप देंगे।"
बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां राज्य सरकार की नीति क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होती हैं। ये संस्थान न केवल सामाजिक और आर्थिक योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक अनुभव देने का भी अवसर प्रदान करते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद से ही पार्टी कार्यकर्ताओं में यह मांग उठ रही थी कि पुराने, सक्रिय और वफादार नेताओं को इन पदों पर मौका दिया जाए।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 50 से अधिक बोर्ड और निगमों में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां लंबित हैं। इन पर विभिन्न गुटों और नेताओं की सिफारिशों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व को संतुलन साधने में कठिनाई हो रही है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच भीतरखाने शक्ति संतुलन की राजनीति भी इस प्रक्रिया को जटिल बना रही है।
रणदीप सुरजेवाला, जो कि कांग्रेस के कर्नाटक मामलों के प्रभारी हैं, इस पूरे मसले को नेतृत्व की सहमति और संगठनात्मक संतुलन के साथ सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कांग्रेस नेतृत्व आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को मनोबल देने और उन्हें सरकार के साथ जोड़ने की रणनीति बना रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नियुक्तियां सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का भी माध्यम हैं। इससे कांग्रेस यह संकेत देना चाहती है कि वह अपने पुराने और वफादार सिपाहियों को नजरअंदाज नहीं कर रही, बल्कि उन्हें संगठन और सरकार के बीच सेतु के रूप में स्थापित कर रही है।
अब सभी की नजरें 16 जुलाई की शाम पर टिकी हैं, जब कांग्रेस की कर्नाटक इकाई और आलाकमान के बीच तालमेल से एक अहम राजनीतिक प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि सूची में किन नए चेहरों को मौका मिलता है और किन पुराने नेताओं की वरिष्ठता को मान्यता दी जाती है।





