संविधान की रक्षा के नाम पर कांग्रेस की दोहरी नीति उजागर , मोदी सरकार पर झूठे आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश: भाजपा

संविधान की रक्षा के नाम पर कांग्रेस की दोहरी नीति उजागर , मोदी सरकार पर झूठे आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश: भाजपा
नई दिल्ली, 4 जुलाई 2025 —
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा हैदराबाद में दिए गए हालिया बयानों ने एक बार फिर कांग्रेस की दोहरे मापदंडों और दिशाहीन राजनीति को उजागर कर दिया है। एक ओर वे संविधान से "धर्मनिरपेक्षता" और "समाजवाद" हटाए जाने की आशंका जताकर देश की जनता को भ्रमित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का अपना इतिहास सांप्रदायिक तुष्टिकरण, आपातकाल, और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग से भरा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा संविधान की सर्वोच्चता को स्वीकार किया है और उसके अनुरूप कार्य किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को मज़बूती दी है, जबकि कांग्रेस अपने शासनकाल में इन संस्थाओं का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती रही है।
खरगे का यह कहना कि “भाजपा-आरएसएस संविधान से धर्मनिरपेक्षता हटाना चाहते हैं”, पूरी तरह से बेबुनियाद और भ्रामक है। यह कांग्रेस की वही रणनीति है जो दशकों से “डर पैदा करो और वोट बटोरो” की मानसिकता पर आधारित रही है। वास्तविकता यह है कि मोदी सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में देश में धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने का कार्य हुआ है, जहां तुष्टिकरण नहीं बल्कि सभी के साथ, सभी का विकास की नीति को प्राथमिकता दी गई है।
जहां तक पाकिस्तान पर की गई टिप्पणियों की बात है, यह वही कांग्रेस है जो उरी और पुलवामा जैसे आतंकी हमलों के बाद भी पाकिस्तान को जवाब देने में असफल रही थी, वहीं मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे निर्णायक कदम उठाकर आतंक के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति को पूरी दुनिया के सामने रखा। आज भारत की विदेश नीति मजबूती से खड़ी है, अमेरिका, जापान, फ्रांस और UAE जैसे राष्ट्र भारत के रणनीतिक साझेदार बन चुके हैं।
खरगे द्वारा डोनाल्ड ट्रंप और संघर्षविराम जैसे पुराने और अपुष्ट मुद्दों को उठाना जनता का ध्यान भटकाने की एक कमजोर कोशिश है। यह वही कांग्रेस है जिसने मणिपुर, कश्मीर, और नक्सल प्रभावित इलाकों में केवल राजनीति की, जबकि मोदी सरकार ने वहां विकास और स्थायित्व की दिशा में ऐतिहासिक पहल की।
जातिगत जनगणना के बहाने कांग्रेस एक बार फिर विभाजनकारी राजनीति को हवा देने का प्रयास कर रही है, जबकि भाजपा ने सामाजिक न्याय को आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से लागू करने की नीति अपनाई है। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास भाजपा का मूल मंत्र है — जो केवल नारा नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई है।
तेलंगाना सरकार की योजनाओं का गुणगान करने वाले खरगे यह भूल जाते हैं कि जिन राज्यों में कांग्रेस शासन कर रही है, वहां भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और रोजगार की स्थिति बेहद चिंताजनक है। तेलंगाना के किसानों की आत्महत्याएं, बिजली संकट और युवाओं में निराशा इसकी गवाह हैं।
कुल मिलाकर, मल्लिकार्जुन खरगे का पूरा भाषण तथ्यों से दूर, भटकाव से भरा और नकारात्मक राजनीति की एक पुरानी मिसाल साबित हुआ। जनता अब समझ चुकी है कि कांग्रेस केवल आरोप लगाकर राजनीति कर सकती है, जबकि भाजपा देश को विकास, सुरक्षा और आत्मगौरव की दिशा में ले जा रही है। ऐसे में आने वाले चुनावों में एक बार फिर जनता कांग्रेस की नकारात्मकता को नकार कर, भाजपा की सकारात्मकता पर मुहर लगाएगी।





