"कांग्रेस ने आतंकवाद के खिलाफ कानून को खत्म कर देश को खतरे में डाला": संसद में गूंजा अमित शाह का तीखा प्रहार, UPA सरकार पर गंभीर सवाल

"कांग्रेस ने आतंकवाद के खिलाफ कानून को खत्म कर देश को खतरे में डाला": संसद में गूंजा अमित शाह का तीखा प्रहार, UPA सरकार पर गंभीर सवाल
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2025 — संसद के मौजूदा सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर कांग्रेस पार्टी और विशेष रूप से मनमोहन सिंह-सोनिया गांधी नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक कहा, "यह मनमोहन सिंह की सरकार नहीं है, अब हम चुप नहीं बैठते।"
अमित शाह ने अपने भाषण में 2002 के आतंकवाद विरोधी कानून POTA (The Prevention of Terrorism Act) को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि, "जब अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर कानून POTA लाया, तो सबसे पहले विरोध करने वाली पार्टी कांग्रेस ही थी। 2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई, तो सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की सरकार ने उसी कानून को खत्म कर दिया। मैं देश से पूछना चाहता हूं — आखिर कांग्रेस ने यह कानून किसके हित में हटाया? क्या आतंकवादियों को राहत देना उनकी प्राथमिकता थी?"
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की यह नीति आतंकवाद से लड़ने के बजाय उसे राजनीतिक रूप से अनदेखा करने की रही है, और इसका खामियाजा देश ने मुंबई हमलों, भारत के अलग अलग शहरों में आतंकी घटनाएँ और कश्मीर घाटी में चरमपंथ के रूप में भुगता।
पाकिस्तान के साथ हुए हालिया संघर्ष पर बात करते हुए अमित शाह ने बताया कि कैसे मौजूदा सरकार ने निर्णायक सैन्य कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "इस बार हम चुप नहीं बैठे। 7 मई को रात 1.26 बजे हमारा काम पूरा हो गया था। हमने 11 पाकिस्तानी एयरबेस तबाह कर दिए। उनमें से आठ एयरबेस पर हमारी सर्जिकल स्ट्राइक इतनी सटीक थी कि पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम हिल गया।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि, "पाकिस्तान ने हमारे नागरिक इलाकों पर हमला किया, लेकिन हमने जवाबी कार्रवाई में सिर्फ उनके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हमारी सेना सुरक्षित रही, लेकिन पाकिस्तान की हमलावर क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई। मजबूरी में 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने हमारे डीजीएमओ को फोन कर युद्धविराम की गुहार लगाई और उसी दिन शाम 5 बजे संघर्षविराम लागू हुआ।"
यह पूरा भाषण इस बात का उदाहरण बना कि कैसे मौजूदा मोदी सरकार आतंकवाद और सीमा पार हमलों को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चल रही है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने सिर्फ कागज़ी कार्रवाई और 'डॉसियर भेजने' तक खुद को सीमित रखा।
अमित शाह के इस प्रहार से यह साफ संदेश गया कि अब भारत की नीति "चुपचाप सहना" नहीं बल्कि "दुश्मन के घर में घुसकर जवाब देना" है। और यह बदलाव सिर्फ सरकार के नेतृत्व से नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाली सोच से आया है — जो कांग्रेस के शासन काल में हमेशा दुर्लभ रही।





