कांग्रेस ने विदेश नीति पर सरकार से मांगा जवाब, गाजा मुद्दे पर भारत की चुप्पी को बताया ‘दुखद और अस्वीकार्य’

कांग्रेस ने विदेश नीति पर सरकार से मांगा जवाब, गाजा मुद्दे पर भारत की चुप्पी को बताया ‘दुखद और अस्वीकार्य’
नई दिल्ली, 17 जुलाई 2025 –
कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए संसद के आगामी मानसून सत्र में इस विषय पर विस्तृत बहस की मांग की है। पार्टी ने विशेष रूप से गाजा संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम प्रस्ताव पर भारत के मतदान से दूर रहने को "दुखद, अस्वीकार्य और गांधीवादी परंपरा के विपरीत" बताया है।
कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने आज इंदिरा भवन स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति में हाल के वर्षों में "पुनर्संतुलन, ईमानदार आत्मनिरीक्षण और दिशा सुधार" की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारत वैश्विक मंचों पर निष्क्रिय और अस्पष्ट भूमिका निभा रहा है, उससे देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
आनंद शर्मा ने कहा कि अतीत में भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया था और कोरिया संकट हो या रंगभेदी शासन के खिलाफ अफ्रीका का संघर्ष – दुनिया ने हमेशा भारत की नैतिक और मानवीय आवाज को सम्मान दिया। लेकिन आज जब गाजा में शांति और मानवाधिकारों की बात हो रही है, तब भारत की अनुपस्थिति वैश्विक समुदाय के लिए एक चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे देश की पहचान उसकी नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है, जो वर्तमान में कमजोर होती दिख रही है।
शर्मा ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह विदेश नीति जैसे गंभीर विषयों पर संसद और विपक्ष को नजरअंदाज कर एकतरफा निर्णय लेती है। उन्होंने कहा,
“जब हम राष्ट्रहित की बात करते हैं, तो उसमें राष्ट्रीय सहमति अनिवार्य होती है। परंतु वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली एकतरफा है, जिससे विदेश नीति में संतुलन और स्थायित्व की कमी आई है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मसलों पर विपक्षी दलों को विश्वास में लिया जाए और राष्ट्रीय सहमति की भावना के साथ निर्णय लिए जाएं। उन्होंने कहा कि आने वाले मानसून सत्र में कांग्रेस इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी।
गाजा युद्धविराम प्रस्ताव पर भारत के वोटिंग से दूर रहने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि “गांधी की धरती ने शांति और मानवता के पक्ष में खड़ा होने से परहेज किया।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका और इज़राइल के सहयोगी कई देशों ने भी युद्धविराम के पक्ष में मतदान किया, जबकि भारत ने तटस्थ रहना चुना।
आनंद शर्मा ने यह भी चिंता जताई कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों की प्रभावशीलता घटती जा रही है, और भारत को सोचना होगा कि इस बदलते वैश्विक ढांचे में वह किस स्थिति में खड़ा है। उन्होंने कहा,
“नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था का लगातार ह्रास हो रहा है। भारत को न केवल प्रतिक्रिया देनी चाहिए, बल्कि नीति निर्धारण में अग्रणी भूमिका भी निभानी चाहिए।”
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने विदेश नीति को लेकर मोदी सरकार की रणनीति पर गंभीर आपत्ति जताई है और संसद में इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बचाने के लिए नैतिक नेतृत्व और सामूहिक विमर्श की आवश्यकता है — न कि मौन और एकतरफा निर्णयों की राजनीति।





