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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:56 · नई दिल्ली संस्करण

रक्षा गठबंधन के तुरंत बाद चीन का बड़ा कदम, पनडुब्बी से मिसाइल टेस्ट किया

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
रक्षा गठबंधन के तुरंत बाद चीन का बड़ा कदम, पनडुब्बी से मिसाइल टेस्ट किया

बीजिंग। चीन ने दक्षिण प्रशांत महासागर में एक लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसके कुछ ही घंटों पहले ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ था। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और कई देशों ने इसे लेकर चिंता जताई है।

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एबीसी के प्रोग्राम '7.30' पर अपनी राय जाहिर की। इस मिसाइल परीक्षण को “क्षेत्र की स्थिरता के लिए अस्थिर करने वाला” बताया। वहीं न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे “गंभीर रूप से चिंताजनक” करार दिया।

चीनी नौसेना के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में इसकी जानकारी दी। बताया कि एक परमाणु पनडुब्बी ने “रणनीतिक मिसाइल” लॉन्च की, जिसमें प्रशिक्षण के लिए सिमुलेशन वारहेड लगाया गया था। बयान में कहा गया कि मिसाइल ने “निर्धारित समुद्री क्षेत्र में सटीक निशाना लगाया” और यह परीक्षण नियमित सैन्य अभ्यास का हिस्सा था।

चीन के रक्षा मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या यह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) थी या नहीं। वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह परीक्षण किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया और सभी संबंधित देशों को पहले ही सूचना दे दी गई थी।

हालांकि, न्यूजीलैंड सरकार ने कहा कि उसे लॉन्च से कुछ घंटे पहले जानकारी दी गई थी और यह परीक्षण न्यूक्लियर-फ्री साउथ पैसिफिक ज़ोन में किया गया।

यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब ऑस्ट्रेलिया और फिजी ने “ओशन ऑफ पीस” नामक एक रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत दोनों देश किसी भी हमले की स्थिति में एक-दूसरे की मदद करेंगे।

यह समझौता क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने कहा कि उन्हें चीन की गतिविधियों की जानकारी पहले से थी, लेकिन मिसाइल परीक्षण को लेकर चिंता बनी हुई है।

ऑस्ट्रेलिया ने इसे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय संयोग नहीं हो सकता, जबकि ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि वह चीन के साथ संवाद बनाए रखे हुए है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

जापानी सरकार ने भी बयान जारी कर चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बताया है।

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