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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:45 · नई दिल्ली संस्करण

अमेरिकी सेना के जब्त किए गए ईरानी कार्गो जहाज से जुड़ा है चीन का संबंध

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
अमेरिकी सेना के जब्त किए गए ईरानी कार्गो जहाज से जुड़ा है चीन का संबंध

वॉशिंगटन। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओमान की खाड़ी में अमेरिकी बलों द्वारा जब्त किया गया ईरानी कार्गो जहाज उन जहाजों के बेड़े का हिस्सा था, जिसका संबंध चीनी बंदरगाहों और संदिग्ध आपूर्ति मार्गों से था।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक एमवी टौस्का नामक ईरानी झंडे वाला कंटेनर जहाज, उन जहाजों के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है जो अक्सर चीन जाते हैं और जिन पर संभावित सैन्य उपयोग वाली सामग्रियों के परिवहन का आरोप रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस जहाज को अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश के बाद रोका गया और बाद में चेतावनी के तौर पर चलाई गई गोलियों से इसका इंजन निष्क्रिय करने के बाद अमेरिकी बलों ने उस पर चढ़ाई की।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा उद्धृत शिपिंग डेटा के अनुसार जब्त किए जाने से पहले के हफ्तों में यह जहाज दो बार दक्षिणी चीन के झुहाई बंदरगाह पर गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि टौस्का एक प्रतिबंधित ईरानी कंपनी द्वारा नियंत्रित है, जिस पर तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए सामान ढोने का आरोप है।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह खुलासा नहीं किया है कि जहाज में क्या सामान था। विश्लेषकों का कहना है कि सक्रिय नाकेबंदी को पार करने की कोशिश यह संकेत देती है कि माल महत्वपूर्ण हो सकता है।

पूर्व अमेरिकी नौसेना अधिकारी चार्ली ब्राउन ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा, “नाकेबंदी तोड़ने का जोखिम उठाना उनके लिए फायदेमंद लग रहा होगा लेकिन उन्होंने गलत निर्णय लिया।”

फॉक्स न्यूज डिजिटल की अलग रिपोर्ट में कहा गया कि यह जहाज ईरान की ओर बढ़ने से पहले दक्षिण-पूर्व एशिया और चीनी बंदरगाहों से होकर गुजरा था। रिपोर्ट में उद्धृत समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि कार्गो “ड्यूल-यूज़” हो सकता है, यानी इसका उपयोग नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जहाज को ईरानी जलक्षेत्र के पास होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब रोका गया था। इससे पहले यह मलेशिया के पोर्ट क्लैंग में रुका था।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मार्ग अक्सर माल की उत्पत्ति को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के जलक्षेत्रों में जहाज-से-जहाज ट्रांसफर आम हैं, जिससे शिपमेंट को ट्रैक करना कठिन हो जाता है।

चीन का कहना है कि वह ईरान को हथियार नहीं देता और ड्यूल-यूज़ वस्तुओं के निर्यात पर नियंत्रण रखता है, लेकिन वह ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देता।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग ने इस जब्ती पर चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है।

यह मामला दर्शाता है कि ईरान का संघर्ष वैश्विक व्यापार नेटवर्क से कैसे जुड़ा हुआ है।

अमेरिकी अधिकारियों ने समुद्री नाकेबंदी के तहत प्रतिबंधित सामान ले जाने वाले जहाजों पर कार्रवाई बढ़ा दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। इस संघर्ष से जुड़े व्यवधानों ने पहले ही तेल और शिपिंग बाजारों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

ईरान लंबे समय से चीन जैसे देशों के साथ व्यापारिक संबंधों पर निर्भर रहा है ताकि प्रतिबंधों के प्रभाव को कम किया जा सके। अमेरिका के दबाव के बढ़ने के साथ ये संबंध और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

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