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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:40 · नई दिल्ली संस्करण

जापान के राष्ट्रीय सूचना ब्यूरो पर सीजीटीएन सर्वे, नए सैन्यवाद को लेकर चेतावनी

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन
जापान के राष्ट्रीय सूचना ब्यूरो पर सीजीटीएन सर्वे, नए सैन्यवाद को लेकर चेतावनी

बीजिंग। जापान में 31 जुलाई को राष्ट्रीय सूचना ब्यूरो औपचारिक रूप से स्थापित किया गया। यह इस बात का प्रतीक है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद 80 से अधिक वर्षों में जापान में विकेंद्रित और बिखरे हुए सूचना कार्य की स्थिति में मूल बदलाव आया है और प्रधानमंत्री के पास सूचनाओं का सर्वोच्च अधिकार होगा। यह मामूली प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि जापान के नई किस्म वाले सैन्यवाद को अमल में लाने का एक तांत्रिक स्तंभ है।

जाहिर है कि जापान के सुरक्षा तंत्र का केंद्रीयकरण और सैन्यीकरण तेजी से बढ़ेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाएगा।

इस मुद्दे को लेकर चाइना मीडिया ग्रुप के अधीन सीजीटीएन ने वैश्विक नेटिजनों में एक जनमत सर्वेक्षण चलाया। इसके परिणामों के अनुसार 86.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं के विचार में यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान की सूचना व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है।

77.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं के विचार में इससे अधिकार का दुरुपयोग और पारस्परिक निगरानी का अभाव पैदा हो सकेगा।

इसके अलावा 83 प्रतिशत उत्तरदाताओं को चिंता है कि जापान की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सूचनाओं का संघर्ष तीव्र होगा, जो क्षेत्रीय देशों के बीच पहले ही कमजोर हुए पारस्परिक सुरक्षा-विश्वास को और गंभीर नुकसान पहुंचाएगा। 87.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं के विचार में यह जापान द्वारा दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के नियंत्रण को तोड़ने और सैन्यीकरण को गति देने की और एक कार्रवाई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जापान की इस नई प्रवृति से सतर्क रहना चाहिए।

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