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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:47 · नई दिल्ली संस्करण

रायपुर : बलौदाबाजार में औद्योगिक हादसे पर सख्त कार्रवाई, रियल इस्पात एंड एनर्जी का किल्न क्रमांक-एक सील

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
रायपुर : बलौदाबाजार में औद्योगिक हादसे पर सख्त कार्रवाई, रियल इस्पात एंड एनर्जी का किल्न क्रमांक-एक सील

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अंतर्गत ग्राम धौराभाठा स्थित मेसर्स रियल इस्पात एण्ड एनर्जी प्रा. लि. के कारखाना परिसर में गुरुवार की सुबह घटित भीषण औद्योगिक दुर्घटना के मामले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाया गया है। दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर कारखाना अधिनियम के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं मेंटेनेंस सहित समस्त कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है।

कार्यालय सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जारी आदेश के अनुसार 22 जनवरी 2026 को प्रातः लगभग 9.40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट एवं गर्म ऐश की बौछार होने से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जब कि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था।

घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार द्वारा उप संचालकों एवं अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ कारखाने का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुर्घटनास्थल की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी की गई । इस दौरान कारखाना प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कारखाना प्रबंधन द्वारा एसओपी का पालन नहीं किया गया। किल्न का शटडाउन किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कराया गया। डस्ट सेटलिंग चेंबर के हाईड्रोलिक स्लाइड गेट को बंद नहीं किया गया, उचित वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित रखरखाव का अभाव रहा तथा श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।

किल्न क्रमांक-01 में विनिर्माण प्रक्रिया एवं मेंटेनेंस कार्य इमिनेंट डेंजर की स्थिति में थे। जिसके चलते कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के अंतर्गत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक कारखाना प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते।आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधात्मक अवधि के दौरान कारखाने में नियोजित समस्त श्रमिकों को देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि में अनिवार्य रूप से किया जाए।

मुख्य कारखाना निरीक्षक सह श्रमायुक्त छत्तीसगढ़ का कहना है कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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