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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:44 · नई दिल्ली संस्करण

भोपाल बैंक फ्रॉड केस में सीबीआई कोर्ट का फैसला, पूर्व मैनेजर और एक अन्य व्यक्ति को भेजा जेल

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भोपाल बैंक फ्रॉड केस में सीबीआई कोर्ट का फैसला, पूर्व मैनेजर और एक अन्य व्यक्ति को भेजा जेल

भोपाल। सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) कोर्ट ने हाल ही में बैंक फ्रॉड केस में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया मिसरौद शाखा के पूर्व सीनियर ब्रांच मैनेजर और एक निजी व्यक्ति को जेल भेज दिया है। साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया है।

जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल को कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया मिसरौद शाखा के पूर्व सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और एक निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को दोषी ठहराते हुए सात साल की सख्त कैद की सजा सुनाई।

साथ ही, दोनों पर कुल 60,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।

यह केस वर्ष 2016 में दर्ज हुआ था, जब बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि पीयूष चतुर्वेदी ने जानबूझकर और धोखाधड़ी करके मेसर्स विजन कंप्यूटर के नाम पर 27 लाख रुपए का टर्म लोन मंजूर किया। इसके बाद, उन्होंने मोहन सिंह सोलंकी के साथ मिलकर यह पैसा मेसर्स अजब कुमार इंडस्ट्रीज के खाते में ट्रांसफर कर दिया जो कि मोहन सिंह सोलंकी की पत्नी कृष्णाबाई सोलंकी की मिल्कियत थी।

कोर्ट के अनुसार, दोनों आरोपियों ने इस पैसे का गलत इस्तेमाल किया और बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया। इस दौरान उन्हें व्यक्तिगत लाभ हुआ जबकि बैंक को वित्तीय नुकसान हुआ।

सीबीआई ने मामले की पूरी जांच करने के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट में केस लड़ा।

कोर्ट ने सबूतों, गवाहों की बातें और सीबीआई की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया और दोनों आरोपियों को 7 साल के लिए जेल भेज दिया। साथ ही 60 हजार रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के बैंक फ्रॉड में शामिल लोग न केवल बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि आम जनता का भरोसा भी तोड़ते हैं। इसलिए पीयूष चतुर्वेदी और मोहन सिंह सोलंकी को सख्त सजा दी गई।

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