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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:43 · नई दिल्ली संस्करण

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को कैबिनेट की मंजूरी, 100 जिलों में कृषि विकास को मिलेगी रफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को कैबिनेट की मंजूरी, 100 जिलों में कृषि विकास को मिलेगी रफ्तार

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को कैबिनेट की मंजूरी, 100 जिलों में कृषि विकास को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली, 16 जुलाई 2025 — प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज "प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना" को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह योजना वर्ष 2025-26 से शुरू होकर अगले छह वर्षों तक लागू रहेगी और देश के 100 चयनित जिलों में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के समग्र विकास पर केंद्रित होगी। यह योजना नीति आयोग की "आकांक्षी जिलों" की अवधारणा से प्रेरित है और खास बात यह है कि यह पहली बार कृषि को केंद्र में रखते हुए इस तरह की व्यापक योजना लाई जा रही है।

इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता को बढ़ाना, फसल विविधिकरण को प्रोत्साहित करना, सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण सुविधाओं को बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों के लिए अल्पकालिक व दीर्घकालिक ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। योजना का क्रियान्वयन 11 मंत्रालयों/विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं के समन्वय और राज्यों की सहभागिता के माध्यम से किया जाएगा। इसमें निजी क्षेत्र और स्थानीय भागीदारी को भी जोड़ा जाएगा।

देशभर से जिन 100 जिलों का चयन होगा, वह मुख्य रूप से तीन प्रमुख मानकों पर आधारित होगा: कम कृषि उत्पादकता, कम फसल चक्र की तीव्रता और कम कृषि ऋण वितरण। हर राज्य से कम से कम एक जिले का चयन सुनिश्चित किया गया है। चयनित जिलों की संख्या संबंधित राज्य के "नेट क्रॉप्ड एरिया" और "ऑपरेशनल होल्डिंग्स" के अनुपात के अनुसार होगी।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। प्रत्येक जिले में "धन-धान्य समिति" गठित होगी जिसमें प्रगतिशील किसानों को भी शामिल किया जाएगा। यह समिति "जिला कृषि एवं सहायक गतिविधि योजना" तैयार करेगी, जिसे राष्ट्रीय लक्ष्यों – जैसे जल और मृदा संरक्षण, प्राकृतिक और जैविक खेती, कृषि आत्मनिर्भरता और फसल विविधिकरण – के अनुरूप बनाया जाएगा।

योजना की प्रगति की निगरानी 117 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) के आधार पर हर महीने एक डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी। साथ ही, नीति आयोग जिला योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन करेगा। हर जिले के लिए एक केंद्रीय नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा जो नियमित आधार पर समीक्षा करेंगे।

इस योजना के तहत लक्षित 100 जिलों में कृषि सुधार के परिणामस्वरूप न केवल इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि देश की औसत कृषि प्रदर्शन भी बेहतर होगी। इससे न केवल स्थानीय उत्पादन और मूल्यवर्धन में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की "आत्मनिर्भर कृषि अर्थव्यवस्था" का सपना भी साकार होगा।

यह योजना किसानों की आमदनी बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और कृषि को एक लाभकारी एवं टिकाऊ क्षेत्र में बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, वास्तव में "सशक्त किसान, समृद्ध भारत" की परिकल्पना को साकार करने का मजबूत माध्यम बनेगी।

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