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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

ट्रंप-किम मुलाकात की चर्चा तेज, दक्षिण कोरिया में सुरक्षा नीति पर विपक्ष का विरोध

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ट्रंप-किम मुलाकात की चर्चा तेज, दक्षिण कोरिया में सुरक्षा नीति पर विपक्ष का विरोध

सोल। कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिका और चीन की सक्रिय कूटनीति के बीच दक्षिण कोरिया की घरेलू राजनीति में भी सुरक्षा नीति को लेकर टकराव तेज हो गया है। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग द्वारा दक्षिण कोरिया-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती के अमेरिकी फैसले का स्वागत किए जाने पर मुख्य विपक्षी दल के नेता जांग डोंग-ह्योक ने तीखी आलोचना की है।

योनहाप ने बताया कि जांग ने राष्ट्रपति ली के रुख को "अभूतपूर्व नैतिक जीत" बताने पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने सुरक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था को छोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के मध्य पूर्व सैन्य अभियान में दक्षिण कोरिया के शामिल नहीं होने और अमेरिका में निवेश में देरी जैसे मुद्दों के कारण वाशिंगटन के साथ तनाव पैदा हुआ है।

विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इस साल उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मुलाकात करेंगे। ट्रंप ने उत्तर कोरिया के पास 57 परमाणु हथियार होने का दावा भी किया है। वहीं, दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री ने प्योंगयांग के पास 80 से 120 परमाणु हथियार होने का अनुमान बताया है।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास लंबे समय से उत्तर कोरिया को रोकने की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है।

ऐसे में ट्रंप का इन अभ्यासों को कम करने का फैसला केवल सैन्य गतिविधियों में बदलाव नहीं है, बल्कि इसे प्योंगयांग के साथ संभावित कूटनीतिक संपर्क की दिशा में एक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति ली ने इस फैसले को कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की दिशा में ट्रंप का महत्वपूर्ण कदम बताया। लेकिन विपक्ष का तर्क है कि सैन्य अभ्यासों में कमी से उत्तर कोरिया को फायदा मिल सकता है और अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है।

विपक्षी नेता जांग ने यहां तक कहा कि अगर ली खुद को ट्रंप और किम के बीच “शांति दूत” के तौर पर पेश करेंगे, तब भी दोनों नेता शायद इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की ओर से आर्थिक दबाव और टैरिफ बढ़ सकते हैं, जिसका असर दक्षिण कोरियाई जनता और कंपनियों पर पड़ेगा।

इसी घटनाक्रम के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोल में कहा है कि बीजिंग कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता कायम करने में अपनी “रचनात्मक भूमिका” निभाता रहेगा।

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