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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:59 · नई दिल्ली संस्करण

नीतीश कुमार की दूरदर्शी नीतियों से दुबई में बिहार के उत्पादों को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान: अंजुम आरा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
नीतीश कुमार की दूरदर्शी नीतियों से दुबई में बिहार के उत्पादों को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान: अंजुम आरा

पटना। बिहार की समृद्ध कृषि परंपरा, पारंपरिक खाद्य उत्पाद और सांस्कृतिक विरासत अब वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रहे हैं। दुबई में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित गल्फ फूड फेस्टिवल में बिहार के जीआई टैग प्राप्त उत्पाद अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और पहचान के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किए जाएंगे। यह जानकारी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा ने मीडिया में जारी बयान में दी।

अंजुम आरा ने कहा कि यह आयोजन बिहार के किसानों, कारीगरों और पारंपरिक उद्यमियों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। इस अंतरराष्ट्रीय फूड फेस्टिवल में सिलाव का खाजा, मिथिला मखाना, कतरनी चावल और मर्चा धान को प्रदर्शित किया जाएगा।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मिठाइयों की श्रेणी में बिहार से केवल सिलाव के खाजा को ही जीआई टैग प्राप्त है, जिसके कारण इसे विशेष रूप से चयनित किया गया है। यह दर्शाता है कि बिहार के पारंपरिक उत्पाद अब गुणवत्ता और पहचान के वैश्विक मानकों पर खरे उतर रहे हैं।

प्रदेश प्रवक्ता ने बताया कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से आयोजित इस फेस्टिवल का उद्देश्य जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी मांग को सुदृढ़ करना है। इससे बिहार के उत्पादों को नया बाजार मिलेगा और इसका सीधा लाभ राज्य के किसानों, कारीगरों तथा छोटे उत्पादकों तक पहुंचेगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शाही लीची, जर्दालू आम, कतरनी व मर्चा चावल, मिथिला मखाना, सिलाव का खाजा, मगही पान, भागलपुर सिल्क, मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कढ़ाई, सिक्की, मंजूषा कला और खटवा कला जैसे जीआई टैग प्राप्त उत्पाद पहले ही बिहार की विशिष्ट पहचान बन चुके हैं। इनसे न केवल बाजार मूल्य में वृद्धि हुई है, बल्कि पारंपरिक हुनर को सम्मान और स्थायित्व भी मिला है।

अंजुम आरा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से बिहार के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार नई ऊंचाइयां मिलेंगी। यह उपलब्धि बिहार के आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिसमें किसान और कारीगर वैश्विक बाजार का हिस्सा बनकर समृद्धि की ओर अग्रसर होंगे।-

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