मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:23 · नई दिल्ली संस्करण

आरएसएस की गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों के भाग लेने पर लगे प्रतिबंध काे हटाने के सरकार के फैसले का भाजपा ने किया स्वागत, प्रतिबंध को बताया असंवैधानिक

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली, । केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की

गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों के भाग लेने पर लगे 58 साल पुराने

प्रतिबंध को हटा लिया है। सरकार के इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)

ने स्वागत किया है। भाजपा ने आरएसएस पर लगाए गए प्रतिबंध को असंवैधानिक

बताया। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर कहा कि 58 साल

पहले 1966 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेने वाले

सरकारी कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाने वाले असंवैधानिक आदेश को मोदी सरकार

ने वापस ले लिया है। मूल आदेश पहले ही पारित नहीं किया जाना चाहिए था।

यह

प्रतिबंध इसलिए लगाया गया क्योंकि 7 नवंबर 1966 को संसद पर बड़े पैमाने पर

गौ-हत्या विरोधी प्रदर्शन हुआ था। आरएसएस-जनसंघ ने लाखों की संख्या में

समर्थन जुटाया था। पुलिस फायरिंग में कई लोग मारे गये थे। 30 नवंबर 1966

को, आरएसएस-जनसंघ के प्रभाव से आहत होकर, इंदिरा गांधी ने सरकारी

कर्मचारियों के आरएसएस में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

भारतीय

जनता पार्टी (भाजपा) के महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक

संघ पर दशकों पहले प्रतिबंध लगाना ही असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक था। अब बैन

हटाया गया है यह स्वागत योग्य कदम है, देश के लिए बहुत अच्छा निर्णय है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सदैव ही राष्ट्र सर्वप्रथम

राष्ट्र को सर्वप्रिय मानने वाला रहा है। समाज के सभी वर्गों में सभी

क्षेत्रों में राष्ट्रवादी, देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाले नागरिक

आगे रहे हैं। कई बार देश के न्यायालय ने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे

राष्ट्रवादी संगठन और उसकी सांस्कृतिक कल्पना, देश के लिए किया जा रहे हैं,

काम की सराहना की है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें