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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

कच्चातिवु द्वीप समझौते को भाजपा ने बताया कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कच्चातिवु द्वीप समझौते को भाजपा ने बताया कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती

नई दिल्ली, 26 जून (हि.स.) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तमिलनाडु से सटे पाक जलडमरूमध्य में स्थित कच्चातिवु द्वीप काे श्रीलंका काे देने के समझाैते के लिए कांग्रेस काे कठघरे में खडा करते हुए इस फैसले काे एक 'ऐतिहासिक गलती' और कांग्रेस सरकार की विदेश नीति काे शर्मनाक बताया है।शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में भाजपा के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज का दिन कांग्रेस के सरेंडर के कैलेंडर का एक और ऐतिहासिक काले अध्याय का दिन है। आज ही के दिन यानि 26 जून 1974 में तमिलनाडु के पास स्थित कच्चातिवु द्वीप को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भारत से अलग कर श्रीलंका को दे दिया था।जिस कारण तमिलनाडु के मछुआरों को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।वहां पर ईसाई समुदाय का पवित्र स्थल सेंट एंटनी श्राइन है, जिस पर जाने के लिए अगर मछुआरे अपनी नाव पर भारत का ध्वज लगाएं तो उन्हें अनुमति नहीं मिलती। यह कांग्रेस की शर्मनाक विदेश नीति के स्मरण का दिन है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सरेंडर का कैलेंडर 1947 में भारत के दो टुकड़े करके मुस्लिम लीग के आगे समर्पण से शुरू होता है।1948 में पाकिस्तान को पीओके सरेंडर करना, 1962 में अक्साई चिन चीन को सौंपना , और असम भी लगभग सौंप ही दिया गया था। इसके बाद कैलास मानसरोवर हाथ से निकल गया, और फिर 26 जून 1974 को कच्चातिवु सौंप दिया गया, जो 28 जून को श्रीलंका के नियंत्रण में आ गया। यह एक दुखद अध्याय है जिसे आज की पीढ़ी को याद रखना चाहिए। यह हमें याद दिलाता है कि कैसे कांग्रेस ने भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता किया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी, जो हाल ही में यूडीएफ के तहत कांग्रेस-मुस्लिम लीग गठबंधन के ज़रिए केरल में सत्ता में आई है, सत्ता के नशे में इतनी चूर लगती है कि केरल सरकार ने एक बेहद शर्मनाक फ़ैसला लिया है। उसने कम अल्कोहल वाली शराब पर एक्साइज़ ड्यूटी 251 प्रतिशत से घटाकर 121 प्रतिशत कर दी है, जिससे असल में शराब पर टैक्स आधे से भी ज़्यादा कम हो गया है।उल्लेखनीय है कि कच्चातिवु द्वीप समझौता 1974 में भारत और श्रीलंका के बीच हुआ एक ऐतिहासिक समझौता था, जिसके तहत भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाक जलडमरूमध्य में स्थित 285 एकड़ का यह निर्जन द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया था।

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