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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:21 · नई दिल्ली संस्करण

प्रधानमंत्री की 'फ्यूल सेविंग' की अपील पर बिहार में 'नो व्हीकल डे' मनाया गया

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
प्रधानमंत्री की 'फ्यूल सेविंग' की अपील पर बिहार में 'नो व्हीकल डे' मनाया गया

पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल और डीजल के उपयोग को कम करने की अपील का असर अब बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यहां कई नेता 'फ्यूल सेविंग' को बढ़ावा देने के लिए परिवहन के वैकल्पिक साधनों को अपना रहे हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पास के पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास से सचिवालय तक पैदल चलकर 'नो व्हीकल डे' मनाया।

लगभग 150 मीटर की इस पैदल यात्रा में उनके साथ मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी थे।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने पटना और आसपास के क्षेत्रों में आधिकारिक यात्राओं के दौरान अपने काफिले का आकार पहले ही कम कर दिया है।

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी इस पहल में शामिल हुए और अपने आधिकारिक आवास से सचिवालय तक लगभग एक किलोमीटर पैदल चले।

उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे अमेरिका-ईरान संघर्ष से उपजे वैश्विक संकट के बीच 'फ्यूल सेविंग' को प्रोत्साहित करने के प्रतीक के रूप में कार्यालय तक पैदल जाएंगे।

इसी बीच, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का विकल्प चुना और इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा से अपने कार्यालय पहुंचे।

तिवारी ने कहा कि हमने ईंधन बचाने का संदेश देने के लिए ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया है। यह अधिकारियों के लिए भी ईंधन बचाने का संदेश है। वैश्विक संकट को देखते हुए, ईंधन बचाना हमें सुरक्षित रहने में मदद करेगा। इस पहल में प्रशासनिक स्तर पर भी भागीदारी देखी गई।

कई जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे।

खगड़िया के जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य न केवल ईंधन बचाना है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना भी है।

गया में सुरक्षाकर्मियों को भी साइकिलों पर आवागमन करते देखा गया, जिससे संरक्षण के व्यापक संदेश को बल मिला।

हालांकि, इन घटनाक्रमों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं।

गया में मौजूद जेजेडी प्रमुख तेज प्रताप यादव ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और बड़े राजनीतिक काफिलों के निरंतर उपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री काफिलों को कम करने की वकालत कर रहे हैं, तो बिहार सरकार को इसे और अधिक सख्ती से लागू करना चाहिए।

ईंधन की कीमतें जनता के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई हैं, ऐसे में बिहार के 'नो व्हीकल डे' ने संरक्षण, शासन और बढ़ती लागतों पर चल रही बहस में एक प्रतीकात्मक लेकिन प्रत्यक्ष आयाम जोड़ दिया है।

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