पूछता है बिहार.. कब होंगे आरोपी गिरफ़्तार ?

पटना हॉस्टल रेप कांड को लेकर बिहार सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के इतने दिनों बाद भी पीड़िता को न्याय मिलता नजर नहीं आ रहा है, जिससे आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब तक हॉस्टल संचालक अग्रवाल दंपत्ति की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? यही नहीं, मुख्य आरोपी बताए जा रहे अग्रवाल दंपत्ति के पुत्र पर भी अब तक कानून का शिकंजा कसता नजर नहीं आया है।
मामला यहीं नहीं रुकता। आरोप है कि साक्ष्यों के साथ आपराधिक छेड़छाड़ की गई। इसके बावजूद प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर सतीश, जिन पर साक्ष्य मिटाने के गंभीर आरोप हैं, अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल को अभी तक सील नहीं किया गया।
इन हालातों में यह सवाल उठना लाज़मी है कि—
👉 क्या वास्तव में निष्पक्ष जाँच चल रही है?
👉 या फिर यह सिर्फ लीपा-पोती का खेल है?
👉 क्या रसूखदार आरोपियों को बचाने की कवायद जानबूझकर जारी है?
बड़ा सवाल
बिहार, जहाँ आज माँ-बहन-बेटियों का जीना मुहाल हो चुका है, क्या वहाँ बलात्कार और हत्या जैसे संगीन मामलों के आरोपियों को साक्ष्य मिटाने और केस मैनेज करने के लिए समय दिया जा रहा है?
जनता पूछ रही है—
कब जागेगा प्रशासन? कब मिलेगी पीड़िता को न्याय? और कब होंगे आरोपी सलाखों के पीछे?
अब निगाहें बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं, जो इस मामले में अपनी कार्रवाई से यह साबित करें कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार क्यों न हो।





