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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:34 · नई दिल्ली संस्करण

भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को होगी सुनवाई, बसंत पंचमी के दिन नमाज पर रोक की मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को होगी सुनवाई, बसंत पंचमी के दिन नमाज पर रोक की मांग

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद मामले में बसंत पंचमी पर पूजा-अर्चना और नमाज पर रोक लगाने को लेकर उठे विवाद के बीच हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इस मामले में शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई होगी।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन ही पड़ रही है, ऐसे में टकराव की आशंका है।

याचिका में 23 जनवरी को भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक लगाने और केवल हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा की अनुमति देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।

याचिका में भोजशाला के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस परिसर में मां वाग्देवी यानी सरस्वती का प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था। याचिका के अनुसार, लंबे समय तक यहां हिंदू नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते रहे हैं।

हिंदू पक्ष ने 7 अप्रैल 2003 को एएसआई द्वारा जारी आदेश का भी जिक्र किया है। इस आदेश के तहत हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा करने की अनुमति दी गई थी, जबकि मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

हालांकि, याचिका में कहा गया है कि एएसआई का यह आदेश उस स्थिति पर पूरी तरह मौन है, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि एएसआई के आदेश में इस तरह की परिस्थिति को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, जिससे टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

यह जगह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत एक संरक्षित स्मारक है। इसे लेकर हिंदुओं का दावा है कि यह 11वीं सदी में परमार राजा भोज द्वारा बनवाया गया देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है।

वहीं, मुस्लमान इसे कमल मौला मस्जिद मानते हैं।

यह व्यापक विवाद ऐतिहासिक दावों से जुड़ा है। हिंदुओं का दावा है कि यह ढांचा मध्ययुगीन आक्रमणों के दौरान कथित विनाश और धर्मांतरण से पहले वैदिक शिक्षा का केंद्र और सरस्वती मंदिर था, जबकि मुसलमान मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती के नाम पर बनी मस्जिद में पूजा की निरंतरता बनाए रखने की बात कहते हैं।

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