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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:47 · नई दिल्ली संस्करण

भरत तिवारी एनकाउंटर केस: रोहिणी आचार्य का सवाल, 'पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?'

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
भरत तिवारी एनकाउंटर केस: रोहिणी आचार्य का सवाल, 'पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?'

पटना,। राजद अध्यक्ष लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में बिहार सरकार द्वारा न्यायिक जांच के आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे 'जनाक्रोश को ठंडा करने की कवायद' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

रोहिणी आचार्या ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि भरत तिवारी फर्जी मुठभेड़ मामले में गठित न्यायिक जांच से त्वरित रूप से कुछ स्पष्ट या उजागर होने की संभावना नहीं दिखती। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायिक जांच की प्रक्रिया लंबी चल सकती है, जिससे इस 'जघन्य हत्याकांड' के दोषियों की जवाबदेही तय होने में काफी समय लग सकता है।

मेरी राय में न्यायिक जांच का यह आदेश जनाक्रोश को ठंडा करने की सरकार की एक कवायद का हिस्सा है।

पिछले लोकसभा चुनाव में सारण से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी रोहिणी ने कहा कि दलितों, वंचितों, शोषितों, पिछड़ों और हाशिए पर खड़ी आबादी के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए जान गंवाने वाले भरत तिवारी के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए कई लोग जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार अब तक सबसे बुनियादी सवालों का जवाब नहीं दे रही है।

उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आखिर कहां है और अब तक उसे सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उनका आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने में हो रही देरी की आड़ में सरकार और पुलिस किसी को बचाने की कोशिश कर रही है।

रोहिणी आचार्या ने कहा कि इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएं विभिन्न न्यायालयों में दायर हैं, और उन याचिकाओं की कानूनी मजबूती के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट बेहद जरूरी दस्तावेज है। ऐसे में रिपोर्ट सार्वजनिक न करना संदेह को और गहरा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भरत तिवारी के परिजन मृतक के मोबाइल फोन की डिटेल्स सार्वजनिक किए जाने की भी मांग कर रहे हैं।

परिजनों का दावा है कि मृतक का मोबाइल फोन फिलहाल पुलिस के कब्जे में है और उसमें इस कथित फर्जी मुठभेड़ के आदेश देने वालों से जुड़े अहम साक्ष्य, जानकारियां और व्हाट्सएप चैट मौजूद हो सकते हैं।

रोहिणी ने आरोप लगाया कि पुलिस इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अपनी 'काली करतूत' पर पर्दा डालने के लिए मोबाइल फोन, उसमें मौजूद डेटा और व्हाट्सएप चैट को नष्ट कर दिया गया हो।

रोहिणी आचार्या ने कहा कि सरकार को न्यायिक जांच के साथ-साथ मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल डेटा की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि भरत तिवारी के परिजनों को न्याय मिल सके और पूरे मामले की निष्पक्ष सच्चाई सामने आ सके।

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