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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:41 · नई दिल्ली संस्करण

बीजिंग ने जापान के पूर्व सैन्य अधिकारी को निशाने पर लिया, लगाया 'वन चाइना पॉलिसी' में दखल का आरोप

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बीजिंग ने जापान के पूर्व सैन्य अधिकारी को निशाने पर लिया, लगाया 'वन चाइना पॉलिसी' में दखल का आरोप

बीजिंग/टोक्यो। चीन-जापान के बीच बिगड़े संबंधों में तल्खी और बढ़ गई है। अब बीजिंग ने सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ शिगेरू इवासाकी के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया है। वहीं जापानी मीडिया ने इसे प्रतीकात्मक प्रतिबंध बताया है, जो इस साल ताइवान की कैबिनेट के सलाहकार के तौर पर उनकी नियुक्ति का जवाब है।

ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, शिगेरू इवासाकी पर 'ताइवान की आजादी' का षड्यंत्र रचने का आरोप है।

चीन ने सोमवार को जापान के सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ शिगेरू इवासाकी के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। आरोप है कि ऐसा अलगाववादी ताकतों के साथ उनके सार्वजनिक मिलीभगत के कारण किया गया है, जिसने वन चाइना पॉलिसी और चीन-जापान के बीच चार राजनीतिक दस्तावेजों की भावना का उल्लंघन किया, चीन के घरेलू मामलों में दखल दिया, और चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को ठेस पहुंचाने की कोशिश की।

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के विदेशी प्रतिबंध विरोधी कानून के अनुच्छेद 3, 4, 5, 6, 9 और 15 के प्रावधानों के अनुसार, चीनी पक्ष ने इवासाकी के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का फैसला किया है।

मंत्रालय ने कहा कि इन जवाबी कदमों में वीजा प्रतिबंध, इवासाकी की संपत्तियों को फ्रीज करना, और उनके साथ किसी भी तरह के लेन-देन या सहयोग पर रोक लगाना शामिल है।

यह फैसला सोमवार से प्रभावी है।

द जापान टाइम्स के अनुसार मामला पुराना है। इवासाकी ने 2012 से 2014 तक एसडीएफ प्रमुख के रूप में काम किया था। उस दौरान, पूर्वी चीन सागर के द्वीपों को लेकर टोक्यो और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ गया था।

उन्होंने एसडीएफ के लिए संयुक्त अभियानों को गढ़ने में मदद की और अमेरिकी सेनाओं के साथ मिलकर काम किया था।

ये प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए गए हैं जब ताइवान को लेकर जापान और चीन के रिश्ते कई वर्षों में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। जापान की पीएम सनाए ताकाइची ने पिछले महीने कहा था कि स्व-शासित द्वीप के खिलाफ चीन की कोई भी सैन्य कार्रवाई जापान के लिए इतना बड़ा खतरा बन सकती है। ऐसे में वो एसडीएफ को कार्रवाई करने की इजाजत दे सकती हैं। उनके इस बयान से बीजिंग नाराज हो गया, क्योंकि वो ताइवान से जुड़े किसी भी मसले को अपना अंदरूनी मामला मानता है।

इवासाकी इस साल दूसरे जापानी नागरिक हैं जिन पर चीन ने प्रतिबंध लगाया है, इससे पहले सितंबर में उसने सांसद हेई सेकी पर भी इसी तरह के कदम उठाए थे। सेकी, जिनका जन्म चीन में हुआ था और बाद में वह जापानी नागरिक बन गए थे, पर बीजिंग ने चीन के अंदरूनी मामलों में दखल देने और उसकी संप्रभुता को कमजोर करने का आरोप लगाया था।

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