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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव: पीएम तारिक रहमान ने डाला वोट, फखरुल-ओली के बीच मुकाबला

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव: पीएम तारिक रहमान ने डाला वोट, फखरुल-ओली के बीच मुकाबला

ढाका। बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान शुरू होते ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के साथ अपना वोट डाला।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, देश के 23वें राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए मतदान प्रक्रिया गुरुवार दोपहर संसद के सत्र कक्ष में शुरू हुई। यह चुनाव मुख्य चुनाव आयुक्त और रिटर्निंग अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन की देखरेख में कराया जा रहा है।

बांग्लादेशी समाचार एजेंसी यूएनबी के अनुसार, राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार मैदान में हैं।

एक ओर बीएनपी के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर हैं, जबकि दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन की ओर से ओली अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। इस चुनाव में 349 सांसद वोट डालने के पात्र हैं।

यह राष्ट्रपति चुनाव पिछले साढ़े तीन दशकों से भी अधिक समय में पहली बार हो रहा है, जहां राष्ट्रपति पद के लिए वास्तविक मतदान कराया जा रहा है।

1991 से अब तक आम तौर पर राष्ट्रपति बिना किसी मुकाबले के चुने जाते रहे हैं।

इससे पहले संसद में मतदान के जरिए तय किया गया आखिरी राष्ट्रपति चुनाव 8 अक्टूबर 1991 को हुआ था।

बांग्लादेश के दैनिक अखबार ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 24 जुलाई को बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफा देने के बाद, राष्ट्रीय संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाना जरूरी है।

इस बार राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला हो रहा है, लेकिन सत्तारूढ़ बीएनपी के पास संख्या बल का स्पष्ट फायदा है। 2026 के संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 210 सीटें जीती थीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन को 77 सीटें मिली थीं। इससे संसद में बीएनपी को स्पष्ट बहुमत है।

पिछले सप्ताह ढाका ट्रिब्यून से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय पीठ के वरिष्ठ वकील एडवोकेट मंजिल मोर्शेद ने कहा, “विपक्ष को पता है कि वह चुनाव हार जाएगा। इसके बावजूद उम्मीदवार उतारना एक राजनीतिक रणनीति है।”

जब उनसे पूछा गया कि जमात-नेतृत्व वाला गठबंधन अपने उम्मीदवार की संभावित हार जानते हुए भी चुनाव मैदान में क्यों उतरा, तो उन्होंने कहा, “राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि जमात और बीएनपी के बीच करीबी संबंध हैं।

संभव है कि उन्होंने सिर्फ औपचारिक रूप से उम्मीदवार उतारा हो, ताकि कोई उन पर चुनाव में हिस्सा न लेने का आरोप न लगा सके या इस मुद्दे पर सवाल न खड़े हों।”

वहीं, चुनाव विशेषज्ञ और ढाका स्थित नागरिक मंच शुजान के संस्थापक बदिउल आलम मजूमदार ने कहा, “राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा लगभग पहले से तय माना जा रहा है। सत्तारूढ़ पार्टी जिस व्यक्ति को समर्थन देगी, वही राष्ट्रपति बनेगा।”

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