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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:40 · नई दिल्ली संस्करण

बलूचिस्तान कोयला खदान हादसा: मरने वालों की संख्या 34 पहुंची, बचाव अभियान जारी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बलूचिस्तान कोयला खदान हादसा: मरने वालों की संख्या 34 पहुंची, बचाव अभियान जारी

क्वेटा,। पाकिस्तान के बलूचिस्तान कोयला खदान धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। सोरेंज इलाके में स्‍थि‍त कोयला खदान में मीथेन गैस की वजह से यह धमाका हुआ। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (पीडीएमए) के हवाले से बताया कि मलबे में फंसे बाकी मजदूरों को निकालने के लिए बचाव अभियान अभी भी जारी है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की र‍िपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को हुए इस हादसे के बाद से अब तक 34 खनिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि खदान में मीथेन गैस इकट्ठा होने की वजह से विस्फोट हुआ।

धमाके के बाद खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे कई मजदूर मलबे के नीचे फंस गए।

अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय खदान में कुल 41 मजदूर मौजूद थे। खदान विभाग, बचाव सेवाओं और जिला प्रशासन की टीमें बाकी फंसे हुए मजदूरों को निकालने के लिए लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

डॉन अखबार के अनुसार, चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ ने बताया कि शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि करीब 4,000 फीट की गहराई पर मीथेन गैस जमा होने के कारण विस्फोट हुआ। इसके बाद खदान में आग लग गई और खतरनाक गैसें फैल गईं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में कोयला खदानों में होने वाले ज्यादातर विस्फोट मीथेन गैस की मौजूदगी की वजह से होते हैं।

मई में भी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शांगला जिले में कोयला खदानों से जुड़े दो अलग-अलग हादसों में दो मजदूरों की मौत हो गई थी जबकि एक अन्य घायल हो गया था।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की र‍िपोर्ट के अनुसार, पहला हादसा अखोरवाल कोयला खदान में हुआ था, जहां काम के दौरान दो मजदूर मलबे के नीचे दब गए थे। बचाव दल, साथी मजदूरों और स्थानीय लोगों ने करीब ढाई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें बाहर निकाला था।

एक अन्य घटना में चपरमश्ती इलाके की एक कोयला खदान में काम कर रहे एक मजदूर की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा इंतजामों की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस मुद्दे पर ध्यान देने और मजदूरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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