मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:56 · नई दिल्ली संस्करण

आखिर क्यों की जा रही है Uttar Pradesh को 4 राज्यों में बांटने की मांग? जानिए क्या है 71 साल पुराना इतिहास

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
आखिर क्यों की जा रही है Uttar Pradesh को 4 राज्यों में बांटने की मांग? जानिए क्या है 71 साल पुराना इतिहास

Uttar Pradesh को विभाजित करने की मांग नई नहीं है। 1955 में बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपनी पुस्तक 'थॉट्स ऑन भाषाई स्टेट्स' में प्रशासनिक सुविधा के लिए यूपी को तीन हिस्सों (पश्चिमी, केंद्रीय और पूर्वी) में बांटने का सुझाव दिया था। वंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने यूपी को चार नए राज्यों पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा से पास कराया था। आज भी यह मुद्दा क्षेत्रीय दलों द्वारा उठाया जाता है। जहां आलोचक इसे चुनावी पैंतरा मानते हैं।

उत्तर प्रदेश को प्रशासनिक और आर्थिक रूप को बेहतर ढंग से चलाने के लिए राज्य को चार हिस्सों में बांटने की चर्चा कोई नई बात नहीं है, बल्कि इसका इतिहास सात दशक से भी ज्यादा पुराना है। समय-समय पर राजनैतिक दलों और दिग्गज नेताओं द्वारा यह मुद्दा उठाया जाता रहा है। उत्तर प्रदेश के विभाजन का यह विचार आज से लगभग 71 साल पहले भी वर्ष 1955 में बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी किया था। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'थॉट्स ऑन भाषाई स्टेट्स' में प्रशासनिक सुगमता के लिए यूपी को तीन हिस्सों (पश्चिमी, केंद्रीय और पूर्वी क्षेत्र) में बांटने का सुझाव दिया था। बाबासाहेब का मानना था कि बड़े आकार के कारण एक ही प्रशासनिक इकाई से पूरे राज्य का संतुलित विकास करना मुश्किल हो रहा है।

बाबासाहेब के इसी विचार को बताते हुए नवंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्य को चार नए राज्यों पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश (हरित प्रदेश) में बांटने का आधिकारिक प्रस्ताव पास करवाया। मायावती सरकार का तर्क था कि विशाल भूगोल और अत्यधिक जनसंख्या के कारण नीतिगत लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति और पिछड़े क्षेत्रों (विशेषकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड) तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के पास यह प्रस्ताव काफी लंबे अरसो से रह गया और आगे राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह ठंडे बस्ते में चला गया।

वैसे आज भी समय-समय पर यूपी के छोटे राज्यों में विभाजन का मुद्दा क्षेत्रीय दलों द्वारा उठाया जाता है। आलोचकों का मानना है कि यह केवल चुनाव में लोगों का विश्वास हासिल करने का पैंतरा भर है, वहीं समर्थकों का तर्क है कि भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य को संभालना और पारदर्शी विकास सुनिश्चित करना बिना पुनर्गठन के बेहद कठिन है। भविष्य में प्रशासनिक दक्षता और जनहित के मद्देनजर इस प्रस्ताव की प्रासंगिकता पर बहस का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें