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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:58 · नई दिल्ली संस्करण

ईरान पर हमलों को ऑस्ट्रेलिया में कम समर्थन, सेना भेजने का विरोध

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
ईरान पर हमलों को ऑस्ट्रेलिया में कम समर्थन, सेना भेजने का विरोध

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के हमलों की वजह से तनाव की स्थिति बरकरार है। एक सर्वे से पता चला है कि ऑस्ट्रेलिया की केवल 26 फीसदी जनता ही ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के हमलों को सही मानती है। वहीं 50 फीसदी आबादी ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की तैनाती को ठीक नहीं मानती।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, स्वतंत्र फर्म 'एसेंशियल रिसर्च' के एक मासिक पोल, 'द एसेंशियल रिपोर्ट' के ताजा अपडेट में बताया गया है कि 10 फीसदी लोग ईरान पर हमले शुरू करने के अमेरिका-इजरायल के फैसले को पूरी तरह से जायज हमला मानते हैं और 16 फीसदी लोग इसे ठीक-ठाक कार्रवाई करार दे रहे हैं।

वहीं ऑस्ट्रेलियाई आबादी का 27 फीसदी हिस्सा इस संघर्ष के सख्त खिलाफ है। 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इसे नामंजूर करते हैं, जबकि बाकी लोग या तो निष्पक्ष रहने में यकीन रखते हैं या इस फैसले को लेकर असमंजस में हैं।

संघर्ष में ऑस्ट्रेलिया के शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर, पोल में शामिल 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ईरान में अमेरिका-इजरायल के जमीनी अभियान के समर्थन में सेना भेजने का विरोध करेंगे, जबकि 21 प्रतिशत ने कहा कि वे ऐसे कदम के पक्ष में हैं।

दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से आने वाले यात्रियों पर बैन लगाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से यह खतरा बढ़ गया है कि शॉर्ट-टर्म वीजा खत्म होने के बाद वे घर जाने से मना कर देंगे।

गृह विभाग का कहना है कि अगले छह महीनों तक ईरानी पासपोर्ट पर यात्रा करने वाले लोगों को पर्यटन या काम के लिए ऑस्ट्रेलिया आने से रोक दिया जाएगा।

एक बयान में कहा गया है, “ईरान में लड़ाई की वजह से यह खतरा बढ़ गया है कि कुछ अस्थायी वीजा होल्डर्स अपने वीजा खत्म होने पर ऑस्ट्रेलिया से बाहर नहीं जा पाएंगे या शायद ही जा पाएं।”

विभाग ने आगे कहा कि वीजा मामले में थोड़ी सी राहत कुछ खास मामलों में दी जाएंगी, जैसे कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के माता-पिता के लिए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 85,000 से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ईरान में पैदा हुए थे और सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में रहने वाले ईरानी समुदाय के पाए जाते हैं।

इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने मेहमान महिला फुटबॉल टीम की सात खिलाड़ियों और अधिकारियों को अपने देश में शरण दी। ऑस्ट्रेलिया के इस कदम से ईरान में भारी नाराजगी है।

दरअसल, एशियन कप मैच के दौरान खेल शुरू होने से पहले खिलाड़ियों ने ईरान का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। इस कदम के बाद ईरान में इन खिलाड़ियों को देशद्रोही करार दिया गया। खिलाड़ियों की इस हरकत को इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ बगावत के तौर पर देखा गया।

उन सात में से पांच ने बाद में ऑस्ट्रेलिया में पनाह लेने का अपना फैसला बदल दिया, जिससे यह शक और बढ़ गया कि उनके परिवार खतरे में आ गए हैं।

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