मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:47 · नई दिल्ली संस्करण

ऑस्ट्रेलिया के नए कानून से टेक दिग्गजों को झटका, बंद कर सकेंगे 'For You' फीड

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ऑस्ट्रेलिया के नए कानून से टेक दिग्गजों को झटका, बंद कर सकेंगे 'For You' फीड

डिजिटल दुनिया में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मनमाने एल्गोरिदम और यूज़र्स के डेटा पर उनके नियंत्रण को चुनौती देने के लिए ऑस्ट्रेलिया एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार 'माय फीड, माय वे' नाम से एक नया ऐतिहासिक कानून लाने की तैयारी में है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया कंपनियों की उस कार्यप्रणाली पर लगाम लगाना है, जिसके जरिए वे गुप्त एल्गोरिदम का उपयोग करके यूज़र्स की फीड पर अपनी पसंद का कंटेंट थोपते हैं।

माय फीड, माय वे' कानून के लागू होने के बाद टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसे वैश्विक टेक दिग्गजों को अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा। इस कानून के तहत: यूज़र्स को यह अधिकार मिलेगा कि वे कंपनियों द्वारा तय किए गए 'फॉर यू' या सिफारिशी कंटेंट वाले एल्गोरिदम को बंद कर सकें। यूज़र्स अपनी फीड को केवल उन अकाउंट्स के आधार पर देख सकेंगे, जिन्हें वे फॉलो करते हैं, वह भी समय के क्रमानुसार। टेक कंपनियां यूज़र्स की ऑनलाइन गतिविधियों और सर्च हिस्ट्री का विश्लेषण करके उन्हें लक्षित (targeted) कंटेंट या विज्ञापन दिखाने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगी।

वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियां यूज़र्स को प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक बांधे रखने (engagement) के लिए एल्गोरिदम का सहारा लेती हैं। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि ये एल्गोरिदम अक्सर सनसनीखेज, भ्रामक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली सामग्री को बढ़ावा देते हैं। बच्चों और किशोरों पर इसका सबसे नकारात्मक असर देखा गया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूज़र्स का अपनी डिजिटल दुनिया पर नियंत्रण होना चाहिए, न कि किसी एल्गोरिदम का।

यद्यपि बिग टेक कंपनियां इस कानून का विरोध कर सकती हैं, क्योंकि इससे उनकी विज्ञापन आय और एंगेजमेंट मॉडल पर असर पड़ेगा, लेकिन यह कानून वैश्विक स्तर पर टेक रेगुलेशन के लिए एक नजीर बन सकता है। यदि ऑस्ट्रेलिया इस कानून को सफलतापूर्वक लागू करता है, तो भारत और यूरोपीय संघ जैसे अन्य देश भी अपने नागरिकों के डिजिटल अधिकारों की सुरक्षा के लिए इस तरह के सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित होंगे।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें