मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:37 · नई दिल्ली संस्करण

ज्ञानवापी की तर्ज पर धार की ऐतिहासिक भोजशाला का एएसआई सर्वे शुक्रवार से होगा शुरू

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

भोपाल मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय पर स्थित

ऐतिहासिक भोजशाला में ज्ञानवापी की तर्ज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग

द्वारा सर्वे किया जाएगा। यह सर्वे शुक्रवार, 22 मार्च को शुरू होगा। इसके

लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने पत्र जारी कर जिला प्रशासन को इसकी

सूचना दी है।

यह पत्र इंदौर कमिश्नर सहित कलेक्टर धार व एसपी धार को

जारी किया गया है। इसमें सर्वे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए बंदोबस्त

करने के लिए कहा गया है। इस पत्र में अधिकारियों ने सर्वे शुरू करने की

बात कही है।

पत्र मिलने के बाद गुरुवार को

धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह प्रशासनिक

टीम के साथ भोजशाला पहुंचे। उन्होंने पूरे परिसर का निरीक्षण किया। कलेक्टर

मिश्रा ने भोजशाला पुलिस चौकी पर अतिरिक्त फोर्स तैनात करने के निर्देश

दिए।

गौरतलब है कि मां सरस्वती मंदिर

भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा मप्र

उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में आवेदन दिया था। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस

की तरफ से एडवोकेट हरिशंकर जैन और एडवोकेट विष्णुशंकर जैन ने पैरवी करते

हुए कोर्ट को कहा कि पूर्व में भी जो सर्वेक्षण हुए हैं, वे साफ-साफ बता

रहे हैं कि भोजशाला वाग्देवी का मंदिर है। इससे अतिरिक्त कुछ नहीं। हिंदुओं

का यहां पूजा करने का पूरा अधिकार है। हिंदुओं को पूजा का अधिकार देने से

भोजशाला के धार्मिक चरित्र पर कोई बदलाव नहीं होगा।

भारतीय

पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से एडवोकेट हिमांशु जोशी ने कोर्ट को बताया कि

वर्ष 1902-03 में पुरातत्व विभाग भोजशाला का सर्वे कर चुका है। इसकी

रिपोर्ट भी कोर्ट में प्रस्तुत है। रिपोर्ट के साथ फोटोग्राफ भी संलग्न

हैं। इनमें भगवान विष्णु और कमल स्पष्ट नजर आ रहे हैं। नए सर्वे की कोई

आवश्यकता ही नहीं है। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर ही 2003 में आदेश जारी

हुआ था।

भोजशाला विवाद सदियों पुराना है।

हिंदुओं का कहना है कि यह सरस्वती देवी का मंदिर है। सदियों पहले मुसलमानों

ने इसकी पवित्रता भंग करते हुए यहां मौलाना कमालुद्दीन की मजार बनाई थी।

भोजशाला में आज भी देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक लिखे हुए

हैं। अंग्रेज भोजशाला में लगी वाग्देवी की मूर्ति को लंदन ले गए थे। याचिका

में कहा गया कि भोजशाला हिंदुओं के लिए उपासना स्थली है।

उच्च

न्यायालय ने संस्था हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई के बाद गत

11 मार्च को भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वे करने के आदेश जारी किए थे। इसमें

पांच सदस्यीय दल भोजशाला का सर्वे करेगा। अलग-अलग बिंदुओं पर यह सर्वे होना

है। इसके तहत मुख्य रूप से यह बात सामने आ सकती है कि यहां पर किस तरह के

प्रतीक चिन्ह है और किस तरह की यहां की वास्तु शैली है। साथ ही यह भी

स्पष्ट हो जाएगा कि यह किस तरह की धरोहर है।

कोर्ट के आदेश

अनुसार, एएसआई महानिदेशक की निगरानी में पांच सदस्यीय टीम भोजशाला का सर्वे

करेगी। इसके साथ ही ये कमेटी अगले छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश

करेगी। साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्ष यानी हिंदू और मुस्लिम पक्ष के दो-दो

प्रतिनिधियों को सर्वे के दौरान वहां मौजूद रहने की अनुमति है। पूरे सर्वे

की वीडियोग्राफी के साथ ही फोटो भी एकत्रित करने का आदेश दिए।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें