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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:54 · नई दिल्ली संस्करण

अशोक गहलोत ने खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर राजस्थान सरकार पर साधा निशाना

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
अशोक गहलोत ने खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर राजस्थान सरकार पर साधा निशाना

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने अपनी डिजिटल सीरीज 'इंतजार शास्त्र' का 17वां अध्याय जारी करके भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार पर अपना हमला और तेज कर दिया है।

इस बार, उन्होंने राज्य में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति और एथलीटों को मिलने वाले सहयोग को लेकर चिंता जताई है।

गहलोत ने अपनी ताजा टिप्पणियों में आरोप लगाया कि राजस्थान स्टेट स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (आरएसएसआई) और जोधपुर के अमृतलाल स्टेडियम जैसी प्रमुख सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के 'अगर राजस्थान खेलेगा, तो राजस्थान खिलेगा' नारे को बढ़ावा देने के बावजूद, पूरी तरह से विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है।

गहलोत ने कहा कि जोधपुर में स्थित राजस्थान स्टेट स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, जिसे कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पटियाला के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स की तर्ज पर विकसित किया गया था और यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से पूरी तरह लैस है।

इसमें सिंथेटिक ट्रैक और ट्रेनिंग की सुविधाएं भी शामिल हैं।

हालांकि, उन्होंने दावा किया कि कोचों की नियुक्ति न होने के कारण यह संस्थान बेअसर हो गया है, जिससे प्रतिभाशाली एथलीट उचित ट्रेनिंग के अवसरों से वंचित हो रहे हैं।

उन्‍होंने कहा कि करोड़ों की लागत से बना यह प्रोजेक्ट अब सरकार की निष्क्रियता के कारण एक 'सफेद हाथी' (बेकार का बोझ) बनता जा रहा है।

गहलोत ने जोधपुर के ऐतिहासिक अमृतलाल स्टेडियम की बिगड़ती हालत का जिक्र किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि रखरखाव की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर जर्जर हो गया है, जिससे स्थानीय एथलीट निराश हैं और उन्हें उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

गहलोत ने सरकार के रवैये को 'दूरदर्शिता की कमी वाला' बताते हुए तर्क दिया कि बड़े निवेश का उपयोग न करना जनता के पैसे की बर्बादी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जोधपुर के प्रोजेक्ट्स को जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है, जिसे उन्होंने मारवाड़ क्षेत्र के युवाओं के साथ अन्याय करार दिया।

अपनी चल रही 'इंतजार शास्त्र' सीरीज के माध्यम से, गहलोत अपने कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स को लगातार सुर्खियों में ला रहे हैं। उनका मकसद मौजूदा सरकार को ऐसी सरकार के रूप में पेश करना है जो पिछले कामों को आगे बढ़ाने के बजाय विकास की गति को धीमा कर रही है।

खासकर सोशल मीडिया पर इस सीरीज ने एक व्यापक राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है, जिसमें राजस्थान में विकास प्रोजेक्ट्स के श्रेय और जवाबदेही को लेकर चर्चा हो रही है।

इस बीच, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा था कि गहलोत को 'संतोष शास्त्र' अपनाना चाहिए। राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को 'संतोष शास्त्र' (संतोष का दर्शन) अपनाने और 'वानप्रस्थ' (सक्रिय राजनीति से संन्यास) ग्रहण करने की सलाह दी।

राठौड़ ने तर्क दिया कि गहलोत का राजनीतिक करियर अब समाप्त हो चुका है और उनसे आग्रह किया कि वे सत्ता का इंतज़ार करना छोड़ दें और नए नेतृत्व के लिए रास्ता बनाएं।

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