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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:03 · नई दिल्ली संस्करण

अर्जेंटीना का इजरायली ऊर्जा कंपनी पर शिकंजा, फॉकलैंड विवाद में आपराधिक मामला दर्ज होगा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
अर्जेंटीना का इजरायली ऊर्जा कंपनी पर शिकंजा, फॉकलैंड विवाद में आपराधिक मामला दर्ज होगा

ब्यूनस आयर्स। दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ महीनों से कई द्वीप चर्चा में बने हुए हैं। इनमें चागोस द्वीप, ईरान का खार्ग द्वीप, बांग्लादेश का सेंट मार्टिन द्वीप शामिल हैं। इस बीच एक और द्वीप सुर्खियां बटोर रहा है और ये फॉकलैंड द्वीप समूह है। जिसे लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच पुराना विवाद उभर आया है।

अर्जेंटीना सरकार ने सोमवार को ब्रिटिश नियंत्रण वाले फॉकलैंड द्वीप समूह में तेल परियोजना संचालित करने वाली इजरायली कंपनी 'नाविटास पेट्रोलियम' और उसके अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने का ऐलान किया है।

राष्ट्रपति जेवियर मिलेई की ओर से शुक्रवार (4 सितंबर) को एक बयान जारी किया गया था।

उनका आरोप है कि नाविटास और उससे जुड़ी कंपनियां उत्तरी फॉकलैंड बेसिन में हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन के लिए ब्रिटिश लाइसेंस का इस्तेमाल कर रही हैं, जो अर्जेंटीना के कानून का उल्लंघन है। विदेश मंत्री पाब्लो क्विरनो ने इस मामले को गंभीरता से उठाने का फैसला किया है।

विवाद के केंद्र में 'सी लायन' नाम की बड़ी अपतटीय तेल परियोजना है। इसे इजरायली कंपनी नाविटास संचालित कर रही है, जिसकी परियोजना में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

ब्रिटेन की रॉकहॉपर एक्सप्लोरेशन भी इसमें भागीदार है। परियोजना से 2028 में तेल उत्पादन शुरू करने की योजना है।

अर्जेंटीना का कहना है, "फॉकलैंड द्वीपों के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का अधिकार हमारे (अर्जेंटीना) पास है और हमारी अनुमति बिना वहां तेल गतिविधियां चलाना गैरकानूनी है।" सरकार ने कंपनियों के अलावा उनके निदेशकों और संबंधित साझेदारों को भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाने की बात कही है।

ब्रिटिश मीडिया आउटलेट 'द गार्डियन' के मुताबिक नाविटास और रॉकहॉपर का कहना है कि उनकी परियोजना फॉकलैंड द्वीप सरकार द्वारा कानूनी रूप से जारी किए गए पेट्रोलियम लाइसेंस के तहत संचालित हो रही है और उसे ब्रिटिश सरकार का समर्थन प्राप्त है।

राष्ट्रपति मिलेई ने हाल के दिनों में फॉकलैंड द्वीपों पर अर्जेंटीना के दावे को पहले से कहीं अधिक आक्रामक अंदाज में उठाया है। उन्होंने तेल परियोजनाओं को अर्जेंटीना के राष्ट्रीय हित और संप्रभुता के लिए खतरा बताया है।

मिलेई का यह रुख ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका फॉकलैंड द्वीपों को लेकर अपनी मौजूदा नीति की समीक्षा कर सकता है। मिलेई ने इन टिप्पणियों को अर्जेंटीना के पक्ष में बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के संकेत के तौर पर पेश किया है। हालांकि, अमेरिका आधिकारिक तौर पर इस संप्रभुता विवाद पर तटस्थ रुख रखता है, जबकि व्यवहार में वह ब्रिटिश प्रशासन को मान्यता देता है।

ब्रिटिश सरकार ने मिलेई के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि फॉकलैंड द्वीप ब्रिटिश रहेंगे और वहां के लोगों की इच्छा का सम्मान किया जाएगा। 1982 में अर्जेंटीना के द्वीपों पर कब्जे के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें ब्रिटेन ने द्वीपों पर फिर नियंत्रण स्थापित कर लिया था।

इस तरह तेल और गैस की दौड़ ने दशकों पुराने फॉकलैंड विवाद को एक बार फिर आर्थिक और भू-राजनीतिक संघर्ष में बदल दिया है। अर्जेंटीना जहां तेल परियोजना को अपनी संप्रभुता के खिलाफ कदम मान रहा है, वहीं परियोजना संचालक इसे फॉकलैंड सरकार द्वारा दिए गए वैध लाइसेंस के तहत चलने वाला व्यावसायिक उपक्रम बता रहे हैं।

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