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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:36 · नई दिल्ली संस्करण

अनंत वासुदेव मंदिर : प्राचीन पद्धति से महाप्रसाद का निर्माण, महाभारत से जुड़ा विशेष रहस्य

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अनंत वासुदेव मंदिर : प्राचीन पद्धति से महाप्रसाद का निर्माण, महाभारत से जुड़ा विशेष रहस्य

भुवनेश्वर। भगवान विष्णु को समर्पित देश भर में कई चमत्कारी मंदिर हैं, जो उनके अलग-अलग रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ओडिशा के भुवनेश्वर में भगवान विष्णु के पुराने और सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में अनंत वासुदेव मंदिर शामिल है, जहां के प्रसाद को श्री जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद जितना पवित्र माना जाता है।

मंदिर की रसोई में महाप्रसाद पुरानी पद्धति और पूरी आस्था के साथ पकाया जाता है।

भुवनेश्वर में बिंदु सरोवर झील के किनारे बसा भगवान विष्णु का अनंत वासुदेव मंदिर अपने आप में खास है। मंदिर की वास्तुकला से लेकर इतिहास तक सब कुछ अनूठा है।

महाप्रसाद की परंपरा कुछ ही मंदिरों में है, जिसमें अनंत वासुदेव मंदिर शामिल है। पहले मंदिर के पुजारी भगवान अनंत वासुदेव को फलों का भोग लगाते हैं और फिर 56 भोगों से तैयार एक खास प्रसाद बनाते हैं, जिसे आज भी मिट्टी के बर्तन में डालकर उपलों की जांच पर पकाया जाता है।

महाप्रसाद में चावल, कई तरह की सब्जियां, नारियल, कई तरह की दालें, और मसाले डाले जाते हैं, लेकिन लहसुन, प्याज और टमाटर का इस्तेमाल नहीं होता है।

यह परंपरा मंदिर में सदियों से चली आ रही है। इस पवित्र प्रसाद का भोग पहले भगवान को लगाया जाता है और उसके बाद भक्तों में बांटा जाता है।

मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा भी अलग है। प्रतिमा के दाएं हाथ में सुदर्शन चक्र है। माना जाता है कि महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र नहीं उठाने का संकल्प लिया था। लेकिन, अर्जुन की रक्षा करने के लिए सुदर्शन चक्र धारण किया था।

अनंत वासुदेव मंदिर में भगवान विष्णु उसी रूप में विराजमान हैं और उग्र और दयालुता दोनों के प्रतीक के रूप में पूजे जाते हैं।

मंदिर की वास्तुकला और शैली प्राचीन है। मंदिर का गोपुरम बहुत विशाल है, जिसमें कई देवी-देवताओं की मूर्तियां अंकित हैं। शिखर पर सुंदर कलाकृतियां भी बनी हैं। इसे देखकर आप भक्तिभाव में डूब जाएंगे।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के साथ, भगवान बलराम और देवी सुभद्रा की पूजा होती है। इसे दूसरा जगन्नाथ मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि दोनों मंदिरों में महाप्रसाद बनाने की परंपरा आज भी जारी है।

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