मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:35 · नई दिल्ली संस्करण

“एमपी के रायसेन में राष्ट्रीय कृषि महोत्सव के लिए सब तैयार, 11 अप्रैल से होगा आगाज़”

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन
“एमपी के रायसेन में राष्ट्रीय कृषि महोत्सव के लिए सब तैयार, 11 अप्रैल से होगा आगाज़”

भोपाल/नई दिल्ली। देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत के हर नागरिक तक पोषणयुक्त आहार पहुंचाना और खेती पर निर्भर 46 प्रतिशत आबादी की आय लगातार बढ़ाना केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।

इसी विजन को जमीन पर उतारने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाले राष्ट्रीय स्तर के ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ को खेती की सूरत बदलने वाला बड़ा कदम बताया है।

शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का मूल उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और जनता को संतुलित पोषण देना है। भारत की 140 करोड़ से अधिक आबादी में से लगभग 46 प्रतिशत जनसंख्या आज भी सीधे खेती पर निर्भर है, इसलिए किसानों की आजीविका सुरक्षित रखना और उनकी आय बढ़ाना सरकार का केंद्रीय सरोकार है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब लक्ष्य केवल अनाज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि अनाज के साथ फल, सब्जियां, दूध, श्रीअन्न और दालों की पर्याप्त उपलब्धता कराकर ठीक पोषण सुनिश्चित करना है।

सरकार एक साथ उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक पद्धतियों के विस्तार पर काम कर रही है। गेहूं और धान के मामले में हमारे भंडार भरे हुए हैं, लेकिन दलहन और तिलहन में आज भी भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का फोकस दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत में औसत कृषि जोत लगभग 0.96 हेक्टेयर रह गई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों में 10-15 हजार हेक्टेयर तक के फार्म हाउस हैं।

इतनी छोटी जोत में खेती को लाभकारी बनाना और आय बढ़ाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने याद दिलाया कि सहकारी खेती का प्रयोग पहले हुआ, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली, ऐसे में अब मंत्रालय का फोकस इंटीग्रेटेड फार्मिंग (समेकित कृषि प्रणाली) पर है। सरकार ने एक हेक्टेयर के मॉडल तैयार किए हैं, जिनमें किसान एक ही जमीन पर अनाज, फल, सब्जियां, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी जैसी एक से अधिक गतिविधियां कर सकेगा।

केवल अनाज पैदा करने से आय सीमित रहेगी, इसलिए कई गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आमदनी बढ़ाना उनका प्रमुख फोकस है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले राष्ट्रीय स्तर की एक-दो बैठकों से बात आगे नहीं बढ़ पाती थी, इसलिए अब पूरे देश को पांच हिस्सों में बांटकर रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं।

पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस जयपुर में संपन्न हो चुकी है, दूसरी 24 तारीख को लखनऊ में होगी, और पूर्वोत्तर व हिल स्टेट्स के लिए अलग कॉन्फ्रेंस का आयोजन प्रस्तावित है, ताकि हर क्षेत्र की अलग एग्रो-क्लाइमेटिक कंडीशन के अनुसार फसलें, किस्में और खेती की पद्धतियां तय की जा सकें।

उन्होंने कहा कि हमारे पास हजारों कृषि वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने रिसर्च के दम पर उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन कई बार शोध लैब तक सीमित रह जाता है, खेत तक नहीं पहुंचता।

इसीलिए अब नीति यह है कि 'रिसर्च को लैब से लैंड तक ले जाएं', यानी वैज्ञानिक और किसान सीधे जुड़ें, प्रयोग खेतों में हों और परिणाम किसानों तक पहुंचे। इसी उद्देश्‍य से पिछले वर्ष शुरू किए गए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को इस साल हर राज्य की जलवायु और फसल चक्र के अनुरूप समय चुनकर चलाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की टीमें किसानों के बीच जाकर प्रशिक्षण देंगी।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 11, 12 और 13 अप्रैल को रायसेन (मध्य प्रदेश) में राष्ट्रीय स्तर का ‘उन्नत कृषि महोत्सव : किसान मेला’ आयोजित किया जा रहा है। यह केवल मेला नहीं, आधुनिक कृषि पद्धतियां सिखाने का एक तरह से प्रशिक्षण शिविर है। इसे हमने कर्मकांड नहीं, गंभीर प्रयास की तरह आयोजित किया है। महोत्सव का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे, जबकि समापन 13 अप्रैल को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रालय के सचिव सहित अन्य अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के डीजी और देशभर के शीर्ष कृषि वैज्ञानिक महोत्सव में भाग लेंगे। उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान कुल 20 विषय आधारित सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनके लिए चार अलग-अलग सेमिनार हॉल बनाए गए हैं।

इन सत्रों में प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल होंगे, फसल कटाई के बाद का प्रबंधन (पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट), कृषि क्षेत्र में एआई समाधान और आधुनिक तकनीक का उपयोग, कृषि मशीनीकरण के माध्यम से आय में वृद्धि, दलहन में उत्पादकता वृद्धि और क्षेत्र विस्तार, हॉर्टिकल्चर और उच्च मूल्य की फसलों के अवसर, इंटीग्रेटेड कृषि अनाज, फल, सब्जियां, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक खेती के समन्वित मॉडल। हर सत्र में चार विशेषज्ञ, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उन्नत किसान और अधिकारी पहले प्रेजेंटेशन देंगे। उसके बाद किसानों के सवालों के जवाब भी दिए जाएंगे।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें