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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:07 · नई दिल्ली संस्करण

'वंदे मातरम' के साथ हुए राजनीतिक छल के बारे में सभी पीढ़ियों को जानना चाहिए : राजनाथ सिंह

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
'वंदे मातरम' के साथ हुए राजनीतिक छल के बारे में सभी पीढ़ियों को जानना चाहिए : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में सोमवार को 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा चल रही है। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वंदे मातरम इतिहास और वर्तमान से गहराई से जुड़ा हुआ है।

लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि इसने पूरे देश को आजादी की लड़ाई के लिए जगाया और ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।

यह सिर्फ बंगाल के स्वदेशी आंदोलन या किसी चुनाव तक सीमित नहीं है।

उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए उस समय 'वंदे मातरम समिति' भी बनाई गई थी। सन 1906 में जब भारत का पहला राष्ट्रीय झंडा तैयार किया गया, उसके बीच में 'वंदे मातरम' लिखा हुआ था। उस समय 'वंदे मातरम' नाम से एक अखबार भी निकलता था।

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'वंदे मातरम' के साथ उतना न्याय नहीं हुआ, जितना होना चाहिए था।

जन-गण-मन राष्ट्रीय भावना में पूरी तरह समा गया, किंतु 'वंदे मातरम' को जान-बूझकर दबाया गया।

सदन के अध्यक्ष को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के साथ इतिहास ने बड़ा छल किया है। इस अन्याय की बात हर भारतीय को जाननी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन सारी कोशिशों के बावजूद 'वंदे मातरम' का महत्व कभी कम नहीं हुआ। यह स्वयं में पूर्ण है, पर इसे अपूर्ण सिद्ध करने की बार-बार कोशिश की गई। इस अन्याय के बावजूद 'वंदे मातरम' आज भी करोड़ों भारतीयों के हृदय में जीवंत है।

उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के साथ जो अन्याय हुआ, उसे जानना जरूरी है। देश की भावी पीढ़ी 'वंदे मातरम' के साथ अन्याय करने वालों की मंशा जान सके। आज हम 'वंदे मातरम' की गरिमा को फिर से स्थापित कर रहे हैं। राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत को बराबर का दर्जा देने की बात की गई थी। जन-गण-मन और वंदे मातरम भारत माता की दो आंखें हैं। वंदे मातरम राजनीतिक नहीं है।

कांग्रेस पर जुबानी हमला करते हुए रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि 'वंदे मातरम' को उपेक्षित किया गया।

उसे खंडित किया गया। वह धरती जिस पर 'वंदे मातरम' की रचना हुई थी, उसी धरती पर 1937 में कांग्रेस ने उसे खंडित करने का निर्णय लिया था। 'वंदे मातरम' के साथ हुए राजनीतिक छल और अन्याय के बारे में सभी पीढ़ियों को जानना चाहिए, इसीलिए इस पर चर्चा हो रही है। क्योंकि यह अन्याय एक गीत के साथ नहीं था, यह आजाद भारत के लोगों के साथ था।

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