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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:47 · नई दिल्ली संस्करण

अय्यर का दावा- मुसलमानों से नफरत के चलते 'वंदे मातरम' अनिवार्य किया

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अय्यर का दावा- मुसलमानों से नफरत के चलते 'वंदे मातरम' अनिवार्य किया

नई दिल्ली। कांग्रेस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि पार्टी 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पैराग्राफ को ही गाने की अपनी परंपरा पर अडिग है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा तय किए गए मार्ग पर चलेगी न कि केंद्र सरकार के नए प्रोटोकॉल पर। वहीं, मणिशंकर अय्यर का कहना है कि मुसलमानों के प्रति नफरत की वजह से 'वंदे मातरम' का पूरा पाठ अनिवार्य किया गया है।

यह बयान कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के उस संकल्प के एक दिन बाद आया है जिसमें 1937 में लिए गए फैसले को दोहराया गया। उस समय सीडब्ल्यूसी ने तय किया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ पहले दो पैराग्राफ ही गाए जाएंगे।

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रगीत का पूर्ण गान आधिकारिक प्रोटोकॉल का हिस्सा बना दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने आईएएनएस से कहा, "मुझे बहुत खुशी है कि कल कांग्रेस ने मजबूती से फैसला किया कि हम 'वंदे मातरम' के सिर्फ पहले दो पद गाएंगे क्योंकि मेरा मानना है कि 1937 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर यह तय किया गया था कि हम सिर्फ पहले दो पद गाएंगे और आज हम फिर उसी रास्ते पर चल रहे हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार ने मुसलमानों के प्रति नफरत की वजह से 'वंदे मातरम' का पूरा पाठ अनिवार्य किया है, तो अय्यर ने पलटवार करते हुए कहा, "और क्या?... वे सोचते हैं कि अगर आप मुसलमानों के खिलाफ हैं, तभी आप हिंदू हो सकते हैं, तभी आप भारतीय हो सकते हैं।"

कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा, "कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने तय किया है कि हम भारत को आज़ादी दिलाने वाले नेताओं-चाहे वे महात्मा गांधी हों, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल या मौलाना आजाद द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलेंगे। जब इन नेताओं ने मिलकर 'वंदे मातरम' के दो-पद वाले वर्जन को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था तो वे देश को देशभक्ति का पाठ कैसे पढ़ा सकते हैं? क्या वे लोग जिन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, हमें देशभक्ति का मतलब सिखा सकते हैं..."

बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने कहा, "सीडब्ल्यूसी हम सभी के लिए सबसे बड़ी और सबसे सम्मानित संस्था है।

हमें रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और राजेंद्र प्रसाद जैसे महान नेताओं के विचारों और फैसलों का पालन करना होगा। इन महान नेताओं ने मिलकर महत्वपूर्ण फैसले लिए थे और उन्होंने जो तय किया, हमें उसका सम्मान करना चाहिए और उसका पालन करना चाहिए।"

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