मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:37 · नई दिल्ली संस्करण

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब ट्रायल कोर्ट में होगी सैफ अली खान की पुश्तैनी संपत्ति विवाद की फिर से सुनवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब ट्रायल कोर्ट में होगी सैफ अली खान की पुश्तैनी संपत्ति विवाद की फिर से सुनवाई

जबलपुर। भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की पुश्तैनी संपत्ति को लेकर चल रहे उत्तराधिकार विवाद में हाईकोर्ट ने नवाब हमीदुल्ला खान के वंशज यसीर सुल्तान और फैज़ा सुल्तान द्वारा दायर याचिका पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 14 फरवरी 2000 को दिए गए फैसले को दोषपूर्ण करार देकर रद्द कर दिया है। पूरे मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया है। याचिकाकर्ता यसीर और फैजा सुल्तान का दावा है कि नवाब की निजी संपत्ति पर सभी वैध वारिसों का अधिकार है।याचिकाकर्ता यसीर और फैज़ा सुल्तान दोनों नासिर मिर्जा की संतान है, जो नवाब हमीदुल्लाह खान की छोटी बेगम के बेटे थे। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि भारत सरकार द्वारा नवाब साजिदा सुल्तान को सम्पूर्ण संपत्ति का एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित करना गलत था। यह संपत्ति केवल सिंहासन की नहीं, बल्कि नवाब हमीदुल्ला खान की व्यक्तिगत संपत्ति थी, और उसका उत्तराधिकार मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत होना चाहिए था। याचिका में कहा गया कि नवाब की संपत्ति उनकी व्यक्तिगत संपत्ति थी, और इस पर सभी वारिसों का उत्तराधिकार मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होना चाहिए था। जबकि भारत सरकार ने 10 जनवरी 1962 को एक अधिसूचना जारी कर नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान को इस संपत्ति का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। साजिदा सुल्तान को भारत सरकार द्वारा अधिकृत रूप से अगला शासक घोषित किया गया था। नवाब हमीदुल्लाह खान की बड़ी बेगम साजिदा सुल्तान के बेटे नवाब मंसूर अली पटौदी थे। इसलिए संपत्ति पर उनका और उनके उत्तराधिकारियों का अधिकार वैध है।ट्रायल कोर्ट ने 14 फरवरी 2000 को याचिका खारिज करते हुए एक पुराने फैसले (1997) को आधार बनाया था। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि "तलत फातिमा हसन बनाम नवाब सैयद मुर्तज़ा अली खान" मामले के आदेश को बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 में पलट दिया गया था। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने कानून की अद्यतन स्थिति पर विचार किए बिना ही वाद खारिज कर दिया और इसलिए उस फैसले को बनाए नहीं रखा जा सकता।प्रतिवादियों, यानी शर्मिला टैगोर, सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा सुल्तान की ओर से कोर्ट में तर्क रखा गया कि भोपाल रियासत के भारत में विलय के समय जो समझौता हुआ था, उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि नवाब की संपत्तियां अगली शासक को हस्तांतरित होंगी।दोनों वादों को नए सिरे से सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट को भेजा गया। वहां यह तय होगा कि नवाब हमीदुल्ला खान की संपत्तियों पर केवल साजिदा सुल्तान और उनके वंशजों का अधिकार है, या फिर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत अन्य वारिसों का भी दावा बनता है। इस ऐतिहासिक रियासत संपत्ति विवाद में आने वाले दिनों में कानूनी रूप से बड़ा मोड़ आ सकता है। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह । वर्ष के भीतर इस मामले का निपटारा करे।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें