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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:54 · नई दिल्ली संस्करण

"100-100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली" अखिलेश यादव पर केशव प्रसाद मौर्य का तीखा प्रहार

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
"100-100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली" अखिलेश यादव पर केशव प्रसाद मौर्य का तीखा प्रहार

"100-100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली" अखिलेश यादव पर केशव प्रसाद मौर्य का तीखा प्रहार

जातिवादी राजनीति और मुस्लिम तुष्टिकरण की साजिश को जनता अब समझ चुकी है

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “100-100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” — यह कहावत श्री अखिलेश यादव पर बिल्कुल सटीक बैठती है। श्री मौर्य ने अपने आधिकारिक X हैंडल (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर समाजवादी पार्टी की कथनी और करनी पर सवाल उठाया और अखिलेश यादव की राजनीतिक नैतिकता को आड़े हाथों लिया।

केशव मौर्य ने लिखा कि 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने न तो पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा की, न ही सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया। बल्कि, सत्ता और संसाधनों का उपयोग अपने परिवार, अपनी जाति और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के लिए किया। उन्होंने ओबीसी वर्ग को एक मजबूत राजनीतिक ताकत के बजाय सिर्फ वोटबैंक के रूप में देखा और उनके वास्तविक सशक्तिकरण के लिए कुछ नहीं किया। यह वही कार्यकाल था जब प्रदेश में गुंडागर्दी, अपराध और प्रशासनिक अराजकता चरम पर थी।

आज जब भारतीय जनता पार्टी गरीबों, पिछड़ों, दलितों और महिलाओं के कल्याण के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है, तब अखिलेश यादव एक बार फिर सामाजिक न्याय की चादर ओढ़कर राजनीति में पवित्रता का नाटक कर रहे हैं। लेकिन यह जनता अब सब जानती है। श्री मौर्य ने स्पष्ट आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की राजनीति का असली चेहरा पिछड़ों और अति पिछड़ों को अगड़ों से लड़ाने की साजिश है, ताकि जातीय तनाव फैलाकर राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।

उन्होंने सपा को "समाप्तवादी पार्टी" करार देते हुए कहा कि यह पार्टी समाजवाद से पूरी तरह भटक चुकी है। न तो विचारधारा बची है, न ही जनसेवा का भाव। अब यह पार्टी सिर्फ एक परिवार के निजी हितों का प्रबंधन करने वाला संगठन बनकर रह गई है। जनता के मुद्दों पर सपा का कोई ठोस रोडमैप नहीं है — बस जाति, धर्म और नफरत की राजनीति से समाज को बांटने की साजिश चल रही है।

इसके विपरीत, भाजपा को केशव प्रसाद मौर्य ने “समाज की सच्ची हितैषी पार्टी” बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र पर पार्टी ईमानदारी से काम कर रही है। भाजपा की सरकारें गांव, गरीब, किसान, महिला, युवा और श्रमिक वर्ग के उत्थान के लिए योजनाएं न केवल बना रही हैं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतार भी रही हैं। यह अंतर जनता अब साफ देख और समझ रही है।

केशव मौर्य ने यह भी दावा किया कि 2027 में जब एक बार फिर उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे, तो भाजपा 2017 और 2022 की तरह ही नहीं, उससे भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी। क्योंकि जनता अब परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति से ऊब चुकी है। समाज को तोड़ने वाली ताकतों को जनता पहले ही नकार चुकी है और आगे भी नकारती रहेगी।

केशव मौर्य का यह बयान न केवल सपा और अखिलेश यादव की नीतियों की आलोचना है, बल्कि यह भाजपा की भावी रणनीति और आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। उत्तर प्रदेश की जनता के सामने अब “विकास बनाम विघटन”, “सुशासन बनाम स्वार्थ”, और “राष्ट्रवाद बनाम परिवारवाद” जैसे विकल्प हैं और इसमें किसे चुनना है, यह तय करने में अब वह धोखा नहीं खा सकती।

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