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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे आप नेताओं ने की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे आप नेताओं ने की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, लगातार हो रहे पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे युवाओं के प्रदर्शन ने सोमवार को राजनीतिक रंग ले लिया। आम आदमी पार्टी (आप) के कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल हुए और केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने तथा आंदोलनकारियों के साथ सख्ती बरतने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन में मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, नेता प्रतिपक्ष आतिशी, गोपाल राय, विधायक संजीव झा और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा समेत कई नेता मौजूद रहे। सभी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी यह दिखाती है कि लोग अब डर से बाहर निकल चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह आंदोलन अब पूरे देश के युवाओं का आंदोलन बन चुका है। उनके मुताबिक, लगातार पेपर लीक की घटनाओं से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों से संवाद करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया। साथ ही उन्होंने आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके की हिरासत का मुद्दा उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जंतर-मंतर और उसके आसपास बड़ी संख्या में युवा जुटे, जिनमें दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के छात्र भी शामिल थे। उनके अनुसार, यह भागीदारी केंद्र सरकार के प्रति युवाओं के बढ़ते असंतोष का संकेत है।

आतिशी ने आरोप लगाया कि यदि सरकार परीक्षा आयोजित कराने में उतनी ही गंभीर होती, जितनी प्रदर्शन रोकने में दिखाई दी, तो नीट, एसएससी, टीईटी समेत अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

गोपाल राय ने कहा कि सरकार को तीन कदम तुरंत उठाने चाहिए—अभिजीत दिपके की रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई। उन्होंने कहा कि छात्रों के धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए।

विधायक संजीव झा ने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। वहीं, अनुराग ढांडा ने कहा कि बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर जवाबदेही चाहती है।

आम आदमी पार्टी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

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