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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:37 · नई दिल्ली संस्करण

आबकारी घोटाला : केजरीवाल को बरी करने के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई टली

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
आबकारी घोटाला : केजरीवाल को बरी करने के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई टली

आबकारी घोटाला : केजरीवाल को बरी करने के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई टलीनई दिल्ली, 11 मई (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं 22 अन्य आरोपितों को ट्रायल कोर्ट से बरी करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच आज नहीं बैठी, जिसकी वजह से सुनवाई नहीं हुई।इसके पहले 8 मई को जस्टिस शर्मा की बेंच ने कहा था कि कोर्ट अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक का प्रतिनिधित्व करने वालों की सहमति का इंतजार कर रही है। उच्च न्यायालय ने 5 मई को कोर्ट की मदद करने के लिए तीन वकीलों को एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का आदेश दिया था। जस्टिस शर्मा की बेंच ने कहा था कि इस मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने कोर्ट की सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है, ऐसे में तीन एमिकस क्यूरी नियुक्त किए जाएंगे।इस मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है। तीनों ने न तो खुद और न ही किसी वकील के जरिए कोई दलील रखने की बात कही है। तीनों ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर भरोसा नहीं है इसलिए वे सत्याग्रह करेंगे।बीस अप्रैल को जस्टिस शर्मा ने दिल्ली आबकारी मामले में बरी करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से हटने की केजरीवाल की मांग को खारिज कर दी थी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि मैं इस आरोप से प्रभावित हुए बिना ही अपना फैसला सुनाउंगी, ठीक वैसे ही जैसा कि मैंने अपने 34 वर्षों के न्यायिक करियर में हमेशा किया है।केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच पर सवाल उठाते हुए सुनवाई से हटने की मांग की थी। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग करते हुए कहा था कि जिस तरह से अब तक इस मामले में अदालती कार्यवाही हुई है, उससे उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही है। केजरीवाल ने कहा था कि बिना पक्ष सुने सेशन कोर्ट के आदेश को गलत बताया। उन्होंने कहा था कि 9 मार्च को जब उच्च न्यायालय में पहली सुनवाई हुई, तो वहां 23 में से एक भी आरोपित मौजूद नहीं था। कोर्ट में सिर्फ सीबीआई मौजूद थी लेकिन जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने पहली ही सुनवाई में बिना दूसरे पक्ष की दलीलें सुने यह कह दिया कि 'प्रथम दृष्टया' सेशंस कोर्ट का आदेश गलत लगता है। बिना रिकॉर्ड मंगवाए और बिना दलीलें सुने कोर्ट इस नतीजे पर कैसे पहुंच गया

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