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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:33 · नई दिल्ली संस्करण

राजगीर में सजेगा शिल्पकारों का बाजार, जीतन राम मांझी करेंगे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा मेले का शुभारंभ

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राजगीर में सजेगा शिल्पकारों का बाजार, जीतन राम मांझी करेंगे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा मेले का शुभारंभ

नालंदा। बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए दो दिवसीय प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेला कल 15 मार्च से शुरू हो रहा है। यह मेला राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 15 और 16 मार्च को आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत होने वाले इस मेले का उद्घाटन केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी करेंगे।

एमएसएमई विकास कार्यालय, पटना के सहायक निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक घमंडी लाल मीणा ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री ने उद्घाटन के लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। यह आयोजन पारंपरिक शिल्पकारों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराने, उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मेले में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़े 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगर भाग लेंगे। इनमें बढ़ई, लोहार, कुम्हार, सुनार, दर्जी, राजमिस्त्री, मोची, नाई जैसे शिल्पकार शामिल हैं। ये कारीगर अपने हाथों से बनाए गए उत्कृष्ट हस्तनिर्मित उत्पादों की शानदार प्रदर्शनी लगाएंगे। आने वाले दर्शक और खरीदार इन उत्पादों की बारीकी देख सकेंगे, उन्हें खरीद सकेंगे और स्थानीय हुनरमंदों का उत्साह बढ़ा सकेंगे। इससे कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और उनके उत्पादों का विपणन आसान होगा।

मेले का उद्देश्य सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं है। यहां कारीगरों को योजना के तहत मिलने वाले लाभों की पूरी जानकारी दी जाएगी। इसमें निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन, डिजिटल लेन-देन के फायदे और कम ब्याज दर पर उपलब्ध ऋण जैसी सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही एमएसएमई मंत्रालय की अन्य योजनाओं जैसे उद्यम पंजीकरण, उद्यमिता विकास और स्वरोजगार से जुड़ी जानकारी भी साझा की जाएगी।

विभाग ने आम नागरिकों, युवाओं और उद्यमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में मेले में पहुंचें।

इससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के सपने को मजबूती मिलेगी। राजगीर का यह मेला न केवल शिल्पकारों के लिए अवसर है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा, जहां वे प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक बाजार का अनुभव कर सकेंगे।

यह आयोजन पूर्वी भारत में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का एक बेहतरीन उदाहरण साबित होगा, जो पारंपरिक कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगा।

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