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आंकड़ों की शक्ति को समझने और देश निर्माण में उसकी भूमिका को पहचानने का दिन

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
आंकड़ों की शक्ति को समझने और देश निर्माण में उसकी भूमिका को पहचानने का दिन

सांख्यिकी दिवस 2025: आंकड़ों की शक्ति को समझने और देश निर्माण में उसकी भूमिका को पहचानने का दिन

नई दिल्ली, 29 जून 2025 : 29 जून को भारत में सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक जयंती नहीं है, बल्कि आंकड़ों (डाटा) की ताकत और उसके सही इस्तेमाल की अहमियत को समझाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिवस देश के महान गणितज्ञ और सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत में आधुनिक सांख्यिकी की नींव रखी और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) जैसी व्यवस्था शुरू की, जिससे देश में योजनाएं और नीतियां तथ्य आधारित और वैज्ञानिक ढंग से बनाई जा सकें।

क्यों मनाया जाता है सांख्यिकी दिवस?

सांख्यिकी केवल गणना या डेटा इकट्ठा करने का नाम नहीं है। यह देश के विकास, नीति निर्माण, योजना और शासन का आधार है। जब किसी योजना के पीछे ठोस आंकड़े होते हैं, तब उसका असर गहराई तक होता है। प्रो. महालनोबिस ने यही रास्ता दिखाया कि कैसे देश को विश्वसनीय आंकड़ों के बल पर सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। सांख्यिकी दिवस का उद्देश्य यही है कि आम जनता, विशेष रूप से युवा पीढ़ी, को बताया जाए कि आंकड़े सिर्फ सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश के भविष्य की नींव होते हैं।

वर्ष 2025 की थीम: "राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 75 वर्ष"

इस साल सांख्यिकी दिवस की थीम है – "राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 75 वर्ष", यानी भारत में डाटा संग्रहण की इस पद्धति ने 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। NSS के जरिए ही हम यह जान पाते हैं कि लोगों की आमदनी कितनी है, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की स्थिति कैसी है और किन क्षेत्रों में सरकार को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

भव्य आयोजन और नई पहलें

इस वर्ष का मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय सांख्यिकी राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह करेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के अध्यक्ष प्रो. राजीव करंदीकर और मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग भी अपने विचार साझा करेंगे।

इस अवसर पर सरकार एक स्मारक सिक्का और 'माई स्टैम्प' भी जारी करेगी जो राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की ऐतिहासिक यात्रा को सम्मान देगा। इसके अलावा, दो महत्वपूर्ण रिपोर्टें भी जारी की जाएंगी –

1. सतत विकास लक्ष्य प्रगति रिपोर्ट 2025,

2. भारत में पोषण सेवन 2022-23 और 2023-24।

साथ ही, एक नया मोबाइल ऐप "जीओआईस्टेट" भी लॉन्च किया जाएगा, जिससे आम लोग सरकारी आंकड़ों तक आसान और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकें।

सम्मान, प्रेरणा और तकनीकी संवाद

इस दिन सांख्यिकी में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्ति को "प्रो. सी.आर. राव राष्ट्रीय पुरस्कार" से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही एक लघु फिल्म दिखाई जाएगी जिसमें राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की यात्रा और उपलब्धियों को दर्शाया जाएगा।

कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा भी होगी जिसका विषय होगा – “आधिकारिक सांख्यिकी पर तकनीकी नवाचारों का प्रभाव”। इस चर्चा में देश के प्रमुख विशेषज्ञ और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जो बताएंगे कि कैसे आज की डिजिटल तकनीक सांख्यिकी को और मजबूत और जन-सुलभ बना रही है।

एक देशव्यापी भागीदारी

इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों, नीति आयोग, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शोध संस्थानों और अन्य विभागों के करीब 700 प्रतिभागी शामिल होंगे। यह कार्यक्रम MoSPI के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी देखा जा सकता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें।

सांख्यिकी दिवस एक औपचारिक आयोजन साथ ही , एक समृद्ध एवं बेहतरीन राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बिना सटीक आंकड़ों के कोई भी योजना अधूरी होती है। प्रो. महालनोबिस का सपना था – एक ऐसा भारत जहाँ हर नीति, हर निर्णय और हर बदलाव तथ्यों पर आधारित हो, न कि अनुमानों पर।

आज जब हम डिजिटल और डेटा युग में हैं, तो सांख्यिकी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इस दिवस के ज़रिए हम न केवल अपने अतीत के महान योगदान को सम्मान देते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को डाटा-प्रेमी, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी देते हैं।

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