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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:00 · नई दिल्ली संस्करण

पूर्वी चंपारण में 60 लाख लोगों को खिलायी जायेगी फाइलेरिया रोधी दवा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पूर्वी चंपारण में 60 लाख लोगों को खिलायी जायेगी फाइलेरिया रोधी दवा

पूर्वी चंपारण। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को सदर अस्पताल मोतिहारी स्थित पारा मेडिकल कॉलेज के सभागार में सिविल सर्जन डॉ रविभूषण श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन सीएस, डीभीडीसीओ, पिरामल, यूनिसेफ़ के जिला प्रतिनिधि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मौके पर सिविल सर्जन डॉ रविभूषण श्रीवास्तव ने बताया कि फाइलेरिया संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा प्रसारित होने वाला गंभीर रोग हैं। इस रोग के लक्षण सामान्यतः 5 वर्ष या कभी-कभी इससे भी अधिक समय के पश्चात दिखते हैं।इस रोग का नियंत्रण जाँच एवं उपचार द्वारा संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि इससे बचाव हेतु जिलेभर में आगामी 10 फरवरी से सभी 27 प्रखंडों में सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए राउंड) की शुरुआत की जाएगी। इस बात का ध्यान रखना है कि आशा व स्वास्थ्य कर्मी के सामने ही दवा खानी है। खाली पेट, गर्भवती या गंभीर बीमार को यह दवा नहीं खानी है। इसमें पहले तीन दिन स्कूलों में बूथ लगाकर दवा खिलाई जाएगी। उसके बाद 14 दिन घर-घर जाकर आशा व स्वास्थ्य कर्मी अपने सामने दवा का सेवन कराएंगे। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरत चन्द्र शर्मा ने कहा कि फाइलेरिया रोधी दवा खुद खाने और अपने परिवारजनों को सेवन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों जनप्रतिनिधि, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, पार्टनर एजेंसी, जीविका, सहित अन्य विभागों के द्वारा जागरूकता फैलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में 72 लाख 95 हजार 443 लोग हैं जिनमें 60 लाख 1 हजार 127 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। सभी 27 प्रखंडों के 2 हजार 4 सौ 95 गाँव में कुल 2 हजार 9 सौ 56 दलों द्वारा दवा खिलाई जाएगी। इसमें आशा, वोलेंटियर 5 हजार 912, सुपरवाइजर 294 लगाई जाएगी। वहीं जिला स्तर पर निगरानी की जाएगी।पिरामल के जिला प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने कहा कि जिले में नाईट ब्लड सर्वे के दौरान 303 फाइलेरिया मिले हैं। फाइलेरिया में सिर्फ हाईड्रोसील का इलाज होता है। हाथीपाँव का इलाज नहीं होता है। इसलिए लोगों को कम से कम लगातार 5 वर्ष तक दवा सेवन करना चाहिए।इस मौके पर सीएस रविशंकर श्रीवास्तव, डीभीडीसीओ डॉ शरत चंद्र शर्मा, डॉ अमृतांशु, डॉ मुकेश कुमार, डॉ सुरुचि, आरबीएस के डीसी डॉ शशि मिश्रा, यूनिसेफ़ जिला प्रतिनिधि धर्मेंद्र कुमार, पिरामल से मुकेश कुमार, सिफार के सिद्धांत कुमार, बिनोद श्रीवास्तव, भीडीसीओ सत्यनारायण उरांव, धर्मेंद्र कुमार, रविंद्र कुमार, प्रेमलता कुमारी, चंद्र भानु सिंह उपस्थित थे।

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