मुंबई में 1,608 अवैध लाउडस्पीकर हटाए गए: धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण की बड़ी पहल

मुंबई में 1,608 अवैध लाउडस्पीकर हटाए गए: धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण की बड़ी पहल
मुंबई, 12 जुलाई 2025 — महाराष्ट्र सरकार ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आर्थिक राजधानी मुंबई में विभिन्न धार्मिक स्थलों से 1,608 अवैध लाउडस्पीकर हटाए हैं। यह कार्रवाई राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि अब ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में जिम्मेदारी सीधे संबंधित पुलिस अधिकारियों की होगी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में हटाए गए लाउडस्पीकरों में 1,149 मस्जिदों, 48 मंदिरों, 10 चर्चों, 4 गुरुद्वारों और 147 अन्य सार्वजनिक स्थलों के उपकरण शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित ध्वनि मानकों के अनुरूप उठाया गया है, जिसमें दिन के समय 55 डेसीबल और रात के समय 45 डेसीबल की सीमा तय की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी भी धर्म के खिलाफ न होकर केवल सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए की गई है।
मुंबई पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई शांतिपूर्ण रही और धार्मिक संस्थानों के साथ पूर्व संवाद और सहमति से की गई, जिससे किसी प्रकार का टकराव या सांप्रदायिक तनाव नहीं उत्पन्न हुआ। कई मस्जिदों और मंदिरों ने स्वेच्छा से लाउडस्पीकर हटा लिए या उनकी आवाज तय सीमा में कर दी। कुछ स्थानों पर समुदायों ने यह निर्णय सकारात्मक रूप में लिया और इसे सार्वजनिक हित में एक उचित पहल बताया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग किया गया, तो संबंधित थानाध्यक्ष के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस स्टेशनों को ध्वनि मापक यंत्र दिए जा रहे हैं ताकि नियमों की निगरानी की जा सके और उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।
ध्वनि प्रदूषण पर सरकार की यह सख्ती नागरिकों के स्वास्थ्य, विद्यार्थियों के अध्ययन और बुज़ुर्गों की शांति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह निर्णय एक ओर जहां कानून के शासन की दृढ़ता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता के बीच संतुलन बनाए रखने का एक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
इस पहल से यह स्पष्ट संकेत गया है कि धार्मिक गतिविधियाँ आस्था का विषय हैं, लेकिन उनका संचालन संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। मुंबई की यह कार्रवाई अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है, जहाँ ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या बना हुआ है।





