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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:08 · नई दिल्ली संस्करण

पीएम मुद्रा योजना के 11 साल: 57.79 करोड़ लोन से 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक वितरण

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पीएम मुद्रा योजना के 11 साल: 57.79 करोड़ लोन से 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक वितरण

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत अब तक 57.79 करोड़ लोन के जरिए 40 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का वितरण किया जा चुका है। सरकार ने बुधवार को योजना के 11 साल पूरे होने पर यह जानकारी दी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस योजना की शुरुआत साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी, जिसका उद्देश्य 'फंडिंग द अनफंडेड' यानी उन लोगों को बिना गारंटी के लोन देना है, जिन्हें पहले बैंकिंग सिस्टम से कर्ज नहीं मिल पाता था। इस योजना के तहत छोटे गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि व्यवसायों को 20 लाख रुपए तक का बिना गारंटी लोन दिया जाता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस योजना ने एमएसएमई और छोटे उद्यमियों के लिए क्रेडिट सिस्टम को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, "पिछले 10 वर्षों में भारत में एक शांत बदलाव आया है, जहां करोड़ों आम लोगों ने आत्मविश्वास के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया है।

उन्होंने यह भी बताया कि कुल लोन में से लगभग दो-तिहाई महिलाओं को दिए गए हैं, जबकि करीब एक-पांचवां हिस्सा पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमियों को मिला है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत नए उद्यमियों को करीब 12.15 करोड़ लोन दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 12 लाख करोड़ रुपए है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमएमवाई माइक्रो-उद्यमिता को बढ़ावा देने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में एक अहम पहल बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि इस योजना से खासकर अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) जैसे वंचित वर्गों को रोजगार के अवसर मिले हैं, जो कुल लाभार्थियों का करीब 51 प्रतिशत हैं, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत है।

यह योजना चार श्रेणियों में काम करती है — शिशु (50,000 रुपए तक), किशोर (50,000 से 5 लाख रुपए), तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपए) और तरुण प्लस (10 लाख से 20 लाख रुपए) — जो लाभार्थियों की जरूरत और व्यवसाय के स्तर के अनुसार तय की जाती हैं।

पीएमएमवाई के तहत मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर के साथ-साथ कृषि से जुड़े कार्यों के लिए टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी की जाती हैं।

यह योजना वित्तीय समावेशन के बड़े ढांचे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 'बैंकिंग से दूर लोगों को बैंकिंग में लाना, बिना सुरक्षा वाले को सुरक्षा देना और बिना फंड वाले को फंड देना' है।

सरकार का कहना है कि पीएमएमवाई आगे भी उद्यमियों को समर्थन देती रहेगी और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देगी।

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