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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

1. दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक युद्धाभ्यास के लिए होनोलूलू पहुंचा भारतीय विमान

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
1. दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक युद्धाभ्यास के लिए होनोलूलू पहुंचा भारतीय विमान

नई दिल्ली। नौसेना का लंबी दूरी का समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी युद्धक पी-8आई विमान अमेरिका के हवाई द्वीप स्थित होनोलूलू पहुंच गया है। भारतीय नौसेना का यह विमान यहां दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय समुद्री युद्धाभ्यासों में से एक ‘रिम ऑफ द पैसिफिक’ (रिमपैक) 2026 में हिस्सा लेगा। यह अभ्यास 01 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है और 31 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है।

अपनी इस भागीदारी से भारतीय नौसेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी बढ़ती सामरिक भूमिका का एक और मजबूत संदेश दिया है। भारतीय नौसेना ने इस तैनाती को 'ब्रिजेस ऑफ फ्रेंडशिप' यानी मित्रता के पुल का प्रतीक बताया है।

नौसेना के अनुसार, यह भागीदारी स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराती है। साथ ही, इससे मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी), समुद्री क्षेत्र की निगरानी और संचालनात्मक सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।

पी-8 आई विमान की बात करें तो, यह भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक समुद्री गश्ती और पनडुब्बी रोधी विमान है। यह लंबी दूरी तक समुद्र में निगरानी करने, दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, समुद्री सुरक्षा अभियानों को अंजाम देने और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी जुटाने में सक्षम है।

इसी कारण यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

वहीं, यह समुद्री अभ्यास ‘रिमपैक’ दुनिया का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास है। इसमें अनेक देशों की नौसेनाएं भाग लेकर समुद्री सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी युद्ध, वायु रक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत जैसे अभियानों का अभ्यास कर रही हैं। इसके अलावा समुद्री डकैती-रोधी अभियान, बारूदी सुरंग निष्क्रियकरण तथा अन्य जटिल समुद्री अभियानों का संयुक्त अभ्यास भी इसमें शामिल है।

इसका उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच समन्वय बढ़ाना और साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित करना है।

रिमपैक 2026 में भारतीय नौसेना की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।

इस अभ्यास के माध्यम से भारतीय नौसेना मित्र देशों के साथ आधुनिक युद्धक तकनीकों, सामरिक अनुभवों और संयुक्त अभियानों की क्षमता को और सुदृढ़ करेगी, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

गौरतलब है कि अदन की खाड़ी में बुधवार को ही समुद्री लुटेरों ने एक व्यापारी जहाज को निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि भारतीय नौसेना की त्वरित और सटीक कार्रवाई ने इन समुद्री लुटेरों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड यहां सही समय पर पहुंचा और संकट में फंसे मालवाहक जहाज एमवी गोल्डन आर्सेनल की मदद की।

इस दौरान नौसैनिक जहाज ने न केवल पूरी स्थिति को नियंत्रित किया, बल्कि जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा भी सुनिश्चित की।

भारतीय नौसेना के मुताबिक, 1 जुलाई को सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइन्स के ध्वज वाले बल्क कैरियर, एमवी गोल्डन आर्सेनल ने अदन (यमन) से अपनी यात्रा के दौरान समुद्री लुटेरों द्वारा हमले के प्रयास की सूचना दी थी। यह घटना जिबूती से लगभग 300 समुद्री मील पूर्व-उत्तर-पूर्व क्षेत्र में हुई थी।

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