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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:48 · नई दिल्ली संस्करण

₹1600 करोड़ की वाटर टनल तैयार, नर्मदा का पानी बदलेगा पांच जिलों की तस्वीर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
₹1600 करोड़ की वाटर टनल तैयार, नर्मदा का पानी बदलेगा पांच जिलों की तस्वीर

कटनी। । मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कटनी जिले की स्लीमनाबाद वाटर टनल की खुदाई का कार्य पूरा हो गया है। लगभग 1600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह 11.952 किलोमीटर लंबी टनल देश की सबसे लंबी वाटर टनल मानी जा रही है। इसके माध्यम से नर्मदा का पानी प्राकृतिक ढलान के जरिए बिना किसी पंप की सहायता के सोन बेसिन तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित 'कृषक कल्याण वर्ष' के तहत सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता दिए जाने के क्रम में यह परियोजना महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) निर्धारित अंतिम बिंदु तक पहुंच चुकी है, जिससे खुदाई का कार्य पूर्ण हो गया है।

बरगी व्यपवर्तन परियोजना की दाहिनी तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116.865 के बीच निर्मित इस टनल का निर्माण कार्य करीब डेढ़ दशक से जारी था। इसके आगे 129 किलोमीटर तक नहर खुले स्वरूप (ओपन कैनाल) में रहेगी। नहर की जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक तथा टनल का व्यास 10.140 मीटर है।

1.85 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव ने बताया कि परियोजना के पूरा होने के बाद लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। साथ ही कटनी शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए भी नर्मदा का पानी उपलब्ध कराया जाएगा तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।

पांच जिलों में पहुंचेगा नर्मदा का जल

इस महत्वाकांक्षी परियोजना से प्रदेश के पांच जिलों का बड़ा भू-भाग सीधे लाभान्वित होगा। इनमें—

- कटनी – 21,823 हेक्टेयर

- मैहर – 54,227 हेक्टेयर

- सतना – 1,04,970 हेक्टेयर

- पन्ना – 448 हेक्टेयर

- रीवा – 3,084 हेक्टेयर

कुल मिलाकर लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।

प्रदेश की सबसे अधिक क्षमता वाली नहर

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली स्लीमनाबाद दाहिनी तट मुख्य नहर (ट्रांस वैली कैनाल) प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक जल वहन क्षमता वाली नहर होगी। इस परियोजना का निर्माण हैदराबाद की मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यूयू. (संयुक्त उपक्रम) द्वारा किया जा रहा है।

परियोजना पूरी होने के बाद नर्मदा का जल सोन नदी बेसिन से जुड़ेगा, जिससे सिंचाई के साथ-साथ पेयजल उपलब्धता में भी सुधार होगा और मध्य प्रदेश के इस क्षेत्र में कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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