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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:31 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार के मदरसों में पढ़ाई जा रही किताब 'तालीम-उल-इस्लाम' में गैर-मुस्लिमों को काफिर बताया

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
बिहार के मदरसों में पढ़ाई जा रही किताब 'तालीम-उल-इस्लाम' में गैर-मुस्लिमों को काफिर बताया

संपादकगण...... इस शीर्षक से पूर्व में प्रकाशित खबर (स्टोरी कोड-19HNAT20) को रद्द करते हुए कृपया संशोधित खबर को ही लें।पटना। बिहार के मदरसों में पढ़ाई जा रही किताब 'तालीम-उल-इस्लाम' में गैर-मुस्लिमों को काफिर बताया गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा, तालीम-उल-इस्लाम किताब को लेकर खूब चर्चा हो रही है। इसे किफायतुल्लाह साहब ने लिखा है। अभी बिहार के मदरसों में बच्चों को बड़े पैमाने पर पढ़ाया जा रहा है। इन मदरसों में गैर-मुस्लिमों के भी दाखिला लेने की खबरें हैं। इस पुस्तक को बिहार राज्य मदरसा बोर्ड ने सलेक्ट किया है।प्रियंका कानूनगो के मुताबिक 'जब आप वेबसाइट पर जाते हैं और इस लिंक को क्लिक करते हैं तब यह लिंक आपको पाकिस्तान में रीडायरेक्ट करता है और जब हम उसका अंग्रेजी अनुवाद पढ़ते हैं तो उसके पेज नंबर 20 और 22 में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जो लोग एक से ज्यादा भगवान को मानते हैं, वो काफिर हैं। बिहार सरकार ने भी माना है कि वहां मान्यता प्राप्त मदरसों में बड़े पैमाने पर हिंदू बच्चे भी पढ़ रहे हैं। इसमें हिंदू बच्चों को ये बताना कि वो एक से ज्यादा भगवान में विश्वास करेंगे तो काफिर कहलाएंगे, एकदम गलत बात है। ऐसे में बच्चों में मनोवैज्ञानिक रूप से गलत असर पड़ेगा। उनके विकास में बाधा उत्पन्न होगी। उनके अंदर एक हीन भावना का विकास होगा। हम राज्य सरकार से लगातार कह रहे हैं कि इन हिंदू बच्चों को मदरसों से बाहर कीजिए।प्रियंका कानूनगो ने कहा कि इसमें सरकारी फंडिंग के साथ ही यूनिसेफ का पैसा भी शामिल है। यूनिसेफ तो बच्चों के हित और अधिकारियों के लिए काम करती है। ऐसे में कैसे यूनिसेफ इस तरह का सिलेबस तैयार कर दे सकती है। यूनिसेफ ने उन पैसों का गलत इस्तेमाल किया है, जो उन्हें पूरी दुनिया से मिले हैं। इसकी जांच यूएन को करनी चाहिए। हम फिलहाल मदरसे की पूरी अध्ययन सामग्री की जांच कर रहे हैं।मदरसा बोर्ड के चेयरमैन ने कहा, एनसीपीसीआर से कोई लिखित सूचना नहीं मिलीइस आलोचना के बाद बिहार मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बी कार्तिकेय धनजी ने बातचीत में कहा कि आयोग से उन्हें ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। कार्तिकेय ने कहा कि एनसीपीसीआर की ओर से भी हमें कोई लिखित या मौखिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। जबतक हमें कोई सूचना नहीं मिलती हम इस विषय में कुछ नहीं बोल सकते हैं। यदि इस तरह की कोई रिपोर्ट है तो हमें सूचित करनी चाहिए। हम इस पर जरूर कार्रवाई करेंगे।मंत्री प्रेम कुमार ने कहा, जांच होनी चाहिएबिहार सरकार में भाजपा के मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि देश के कई राज्यों में इस बात को लेकर चर्चा हुई है। ये देशहित में नहीं है। उन स्थानों (मदरसा) पर निश्चित तौर पर जांच होनी चाहिए। उनके गतिविधियों की जानकारी सरकार तक होनी चाहिए। यदि कोई सरकार विरोधी या राष्ट्र विरोधी काम कर रहा है तो हमारा मानना है कि ऐसे संस्थाओं की जांच होनी चाहिए। उन पर अंकुश लगनी चाहिए।

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