आसमान पर दाल की कीमत, सरकार अब उठाने जा रही यह कदम, उम्मीद दाल की दामों पर लगेगी लगाम
देश में दलहन की दामों में कोई कमी नही है। आज भी दाल 100रुपए के पार है इसमें अरहर दाल तो दो सौ किलो के पार है। आम लोगों में सवाल यह है कि सरकार दालों की कीमतों विशेष रूप से अरहर की कीमतों में अंकुश लगाने में क्यों असफल रही है।
वैसे दलहन आत्मनिर्भरता की शुरुआत अरहर से करते हुए सरकार ने एक वेब पोर्टल लांच किया है, जिस पर अरहर की खेती करने वाले किसान पंजीकरण कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर आनलाइन अरहर बेच सकेंगे।
चलिए थोड़ा आगे बढ़ते हैं। भारत को कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, मोजांबिक और तंजानिया जैसे देशों से दाल का आयात करना पड़ता है तो इसके लिए देश के किसान नहीं, बल्कि हरित क्रांति की एकांगी नीतियां जिम्मेदार हैं। मोदी सरकार के प्रयासों से भारत चना और मूंग के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है।
अब इस सरकार ने अरहर, उड़द और मसूर के मामले में देश को 2027 तक आत्मनिर्भर बनाने का एलान करते हुए कहा है कि वर्ष 2028 से एक किलो दाल भी आयात नहीं होगी।





