एक जैसी गलतियां दोहराने के कारण हारी भारतीय महिला हॉकी टीम
टोक्यो । पेरिस ओलंपिक के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम के क्वालीफाई नहीं कर पाने के बाद जहां खिलाड़ियों में निराश है। वहीं इससे ये भी साफ हो गया है कि टीम अपनी गलतियों को अबतक टीम नहीं कर पायी है। टीम पैनाल्टी कार्नर को गोल में बदलने में असफल रहने के साथ ही बार बार एक सी गलतियों को करती दिखी। इसके अलावा उसके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी भी नजर आयी। वहीं टीम के मुख्य कोच यानेके शॉपमैन को हटाया जाना भी अब तय है। हॉकी इंडिया ने हालांकि अभी किसी बदलाव से इंकार किया है। पिछले दो ओलंपिक खेल चुकी भारतीय महिला हॉकी टीम तीन दशक की मेहनत के बाद भी विश्व स्तर पर अभी सफल नहीं हो पायी है। टोक्यो ओलंपिक में टीम चौथे स्थान पर रही थी।
वहीं हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा ,‘‘ यह निराशाजनक रहा। अब हमें अगले ओलंपिक के लिए नये सिरे से शुरुआत करनी होगी। अगले ओलंपिक की तैयारी में अभी चार साल का पर्याप्त समय है।’’ भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन के लिए हॉकी इंडिया के कुछ फैसलों को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तान रही रानी रामपाल को बिना किसी कारण के बाहर कर दिया गया। रानी को टीम से हटाकर जूनियर टीम के कोच पद की जिम्मेदारी दे दी गयी। इसके अलावा पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ दीप ग्रेस इक्का और गुरजीत कौर की जगह अनुभवहीन युचा खिलाड़ियों को शामिल कर लिया गया। को भी युवा खिलाड़ियों को जगह देने के लिये बाहर किया गया लेकिन यह फैसला भी आत्मघाती रहा। मुख्य कोच शॉपमैन भी टीम के साथ लगातार नहीं बने रहे जिससे भी टीम को नुकसान हुआ।





