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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:56 · नई दिल्ली संस्करण

योगीराज में बदहाल हुई संविदा कर्मियों की जिंदगी, नहीं कोई सुनवाई! योगी सिर्फ छवि चमकाने में जुटे

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन
योगीराज में बदहाल हुई संविदा कर्मियों की जिंदगी, नहीं कोई सुनवाई! योगी सिर्फ छवि चमकाने में जुटे

नई दिल्ली/लखनऊ से एक साथ

उत्तर प्रदेश

में आंगनवाडी, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और आशा बहनों की हालत बद से बदतर

होती जा रही है। कहने को तो उ.प्र. को बदलकर रख दिया है योगी सरकार ने लेकिन कुछ

नहीं बदला तो संविदा कर्मियों की बदहाल जिंदगी। जिनके सामने एक तरफ कुआं है तो

दूसरी तरफ खांई। जी हां इन तीनों संस्थाओं में लगभग महिलाओं की ही नियुक्ति होती

है। सबसे पहले कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की चर्चा करते हैं। कस्तूरबा गांधी

बालिका विद्यालय में पढ़ाने वाली महिलाओं का वेतन इतना कम है कि वे अपना परिवार और

खुद की खर्चा पूरा नहीं कर सकती हैं। पिछले 10 साल से उनके वेतनमान में कोई

बढ़ोत्तरी नहीं की गयी है। जिन महिलाओं की नियुक्ति पूर्णकालिक अध्यापिका के पद पर

हुआ था उन्हें योगी आदित्य नाथ की सरकार ने अंशकालिक बना दिया और उनका वेतन 22

हजार की जगह साढे 8-9 हजार कर दिया है। उसी में किराए का कमरा लेना और अन्य खर्चे

शामिल हैं। भला आज की महंगाई के इस युग में 8-9 हजार में कैसे कोई अपना सामान्य

जीवन जी सकता है और परिवार चला सकता। मजबूरी भला क्या नहीं कराती।

आज उत्तर प्रदेश

में छ घंटे का रोजाना काम करके एक श्रमिक भी 5 से 7 सौ रूपए प्रतिदिन कमा लेता है।

देश के महानगरों में तो मजदूरों की मजदूरी और भी ज्यादा है। कस्तूरबा गांधी

विद्यालयों में पढ़ाने वाली महिलाओं का वेतन पिछले लगभग 8-9 सालों से एक रूपया भी

योगी आदित्यनाथ सरकार ने बढ़ाया है। जबकि निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों

का प्रति साल 10-20 प्रतिशत वेतन बढ़ा दिया जाता है। अपने साथ हुए अन्याय को लेकर

कस्तूरबा गांधी की अध्यापिकाओं ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय दो बार गयीं जहां से दो

बार उन्हें जीत मिली है। उसके बाद निर्दयी योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कस्तूरबा

गांधी के कर्मियों के खिलाफ याचिका उच्चतम न्यायालय में दायर कर रखी है। जहां

मामला लंबित है। कहने का मतलब उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार में आज

उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में संविदा पर काम करने वाले कर्मियों का जितना

शोषण हो रहा है उतना निजी क्षेत्र में भी कभी नहीं होता। और लोग इतने मजबूर हैं कि

अपने को शोषित होने के लिए मजबूर हो गए हैं।

हम बता दें कि

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में चपरासी को 4-5 हजार, रसोइयां को 6 से 7 हजार,

अंशकालिक अध्यापकों को 9 हजार, पूर्णकालिक (जिन्हें स्कूल में 24 घंटे रहना पड़ता

है) उन्हें 22 हजार, वार्डेन को 25 हजार दिया जाता है। इसमें एक महत्वपूर्ण तथ्य

को यहां दोहरा दें कि जिन अध्यापिकाओं की नियुक्ति पूर्णकालिक अध्यापिका के पद पर

हुआ था उन्हें जबरन अंशकालिक कर दिया गया है और उनका वेतन 22 से लगभग 9 हजार के

आस-पास योगी आदित्याथ की सरकार ने कर दिया है। जिसका मामला उच्चतम न्यायालय में है

और लंबित है। यानि जहां कर्मचारियों का पदोन्नति होती है वहीं योगी राज में सविंदा

कर्मियों की अवनति हो रही है। ऐसा नहीं है कि ये बेसहारा मजबूर कर्मी चुप हैं कई

बार मामले को राज्य शासन और योगी तक पहुंचाने की कोशिश की लेकिन योगी सरकार गूंगी

बहरी बनी हुई है कोई सुनवाई नहीं है।

आज जिन

कर्मियों का इतने कम वेतन पर पूरा शोषण किया जा रहा है उससे कई गुना खर्च करके

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी छवि चमकाने के लिए दिल्ली से

लेकर पूरे प्रदेश में विज्ञापन पर खर्च कर रहे हैं। विज्ञापन की जगह यदि हकीकत में

उत्तर प्रदेश के लोगों की दुख दरिद्र दूर करने के लिए पैसे खर्च किए जाते तो योगी

की छवि अपने आप चमक जाती। जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली

लड़कियों का खाने पीने का जो बजट आता है उसका कमीशन वार्डन से लेकर शीर्ष

अधिकारियों तक बंट जाता है। इन विदयालयों में पढ़ाने वाली अध्यापक अध्यापिकाओं को

जल्दी छुट्टी भी नसीब नहीं होती।

इस समय जहां

शीत कालीन अवकाश है और समूचे उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तर भारत में शीत लहर चल रही

है वहीं उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों को जबरन खोलकर रखा गया है। कुल

मिलाकर कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में कर्मी फटेहाल में रहने को विवश

है। 24 घंटे और हर दिन काम के बाद भी सामान्य

वेजेज भी नहीं मिल पा रहा है। जबकि केंद्र और राज्य सरकारें न्यूनतम वेतन देने की

वकालत करती हैं। पर्व त्योहार में विद्यालय में काम करना होता है। राज्य स्तर पर

कई बार इसके लिए आवाज उठाई गयी है। लेकिन इसकी सुधि नहीं लिया जा रहा है। यही

कमोवेश हाल आंगनवाड़ी और आशा बहनों की है जिनकी तमाम समस्याओं को योगी आदित्यनाथ

ने अनसुनी कर रखी है। हम बता दें कि जब योगी आदित्यनाथ नए नए मुख्यमंत्री बने हुए

थे तो उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि आंगनवाड़ी, आशा बहनों और

कस्तूरबा गांधी में कार्यरत महिलाओं की समस्याएं हमें पता हैं और हम इसका समाधान करेंगे।

लेकिन योगी आदित्यनाथ का एक कार्यकाल बीत गया समस्याएं बनी कर बनी रह गयीं और अब

दूसरा कार्यकाल चल रहा है अभी भी समस्याएं ज्यों कि त्यों हैं।

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