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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:34 · नई दिल्ली संस्करण

नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व, साधकों को मिलती हैं आठ सिद्धियां

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व, साधकों को मिलती हैं आठ सिद्धियां

नोएडा। नवरात्र के नौवें और अंतिम दिन मां भगवती के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी का नील वर्ण स्वरूप भक्तों को सिद्धियां प्रदान करने वाला होता है।

मां सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की आध्यात्मिक और लौकिक सिद्धियों की दात्री माना गया है, इसलिए साधक पूरे श्रद्धा भाव से उनकी आराधना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों, विशेष रूप से मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है कि मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को आठ प्रमुख सिद्धियां प्रदान करती हैं। इनमें अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। इन सिद्धियों को प्राप्त करने वाला साधक जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का प्रतीक बन जाता है।

यही कारण है कि नवरात्र के अंतिम दिन देवी के इस स्वरूप की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।

मां सिद्धिदात्री को महालक्ष्मी का ही एक स्वरूप भी माना जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन में धन, वैभव और खुशहाली का संचार करती हैं। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं, जिससे उन्हें आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सांसारिक सुखों की भी प्राप्ति होती है। नवरात्र व्रत का समापन भी मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ ही किया जाता है।

इस दिन कन्या पूजन और भोज का विशेष महत्व होता है। छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है, जिससे देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

इसके अलावा, यज्ञ और हवन का आयोजन भी इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कुल मिलाकर, नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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