मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:34 · नई दिल्ली संस्करण

ग़ाज़ियाबाद में जलभराव : कारोबारी ने नगर आयुक्त को भेजा लीगल नोटिस

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ग़ाज़ियाबाद में जलभराव : कारोबारी ने नगर आयुक्त को भेजा लीगल नोटिस

ग़ाज़ियाबाद में जलभराव : कारोबारी ने नगर आयुक्त को भेजा लीगल नोटिस

ग़ाज़ियाबाद में एक बार फिर जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल गई है। इस बार मामला केवल असुविधा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाखों रुपये के नुकसान में बदल गया। शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी अमित किशोर की मर्सिडीज़ कार तेज़ बारिश के बाद सड़क पर हुए जलभराव में डूब गई, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। जब कार को नोएडा स्थित सर्विस सेंटर ले जाया गया, तो मरम्मत का अनुमानित खर्च 5 लाख रुपये बताया गया।

इस घटना से क्षुब्ध होकर अमित किशोर ने ग़ाज़ियाबाद नगर निगम के आयुक्त को एक विधिक नोटिस (लीगल नोटिस) भेजा है, जिसमें उन्होंने न केवल क्षतिपूर्ति की मांग की है, बल्कि यह भी आरोप लगाया है कि नगर निगम ने मानसून से पहले नालियों की सफाई में गंभीर लापरवाही बरती, जो जलभराव का मुख्य कारण बनी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शायद पहला मौका है जब किसी नागरिक ने ग़ाज़ियाबाद नगर निगम को नाली सफाई में हुए कथित भ्रष्टाचार के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए कानूनी कार्रवाई की शुरुआत की है। यह कदम नगर निगम की जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

इस नोटिस के माध्यम से अमित किशोर ने यह स्पष्ट किया है कि शहर में करदाता नागरिकों को केवल टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उन्हें मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता और प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाने का अधिकार है।

नगर निगम की ओर से अब तक इस लीगल नोटिस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वहीं, शहर के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों ने इस पहल को "जवाबदेही की ओर बढ़ता एक साहसिक कदम" बताया है। यदि यह मामला अदालत तक जाता है, तो यह न केवल ग़ाज़ियाबाद प्रशासन के लिए चेतावनी साबित हो सकता है, बल्कि देशभर के शहरी निकायों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें